कक्षा 8 की NCERT सामाजिक विज्ञान किताब में न्यायपालिका से जुड़े विवादित कंटेंट पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी। CJI सूर्यकांत ने कड़ी टिप्पणी की। इससे पहले पीएम मोदी ने भी कैबिनेट बैठक में नाराजगी जताई थी। अगली सुनवाई 11 मार्च 2026 को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने लगाया किताब पर प्रतिबंध
New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा आठवीं की NCERT सामाजिक विज्ञान भाग-2 की विवादित किताब पर सख्त रुख अपनाते हुए पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। 26 फरवरी को हुई सुनवाई में किताब के अंतर्गत न्यायपालिका से जुड़े अध्याय को लेकर गंभीर आपत्ति जताई गई।
सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) को फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि इस तरह की सामग्री बच्चों में न्यायपालिका के प्रति एकतरफा राय बना सकती है, जिससे संस्थान की गरिमा प्रभावित होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल माफी मांगना पर्याप्त नहीं है और मामला आपराधिक अवमानना के दायरे में आ सकता है।
विवाद ‘Exploring Society: India and Beyond, Vol II’ नामक पुस्तक को लेकर शुरू हुआ। इस किताब में न्यायपालिका में कथित भ्रष्टाचार और लंबित मामलों के आंकड़ों का उल्लेख किया गया था। अध्याय में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और अधीनस्थ अदालतों में लंबित मामलों का जिक्र था। साथ ही तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई के बयान को भी शामिल किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि किताब की सभी हार्ड कॉपी, सॉफ्ट कॉपी और रिटेल में उपलब्ध प्रतियां तत्काल हटाई जाएं। डिजिटल प्लेटफॉर्म से भी इसे हटाने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने NCERT के निदेशक को दो सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट पेश करने को कहा है और स्कूलों में भेजी गई प्रतियां भी वापस लेने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान NCERT ने स्वीकार किया कि यह सामग्री अनजाने में प्रकाशित हुई और इसके लिए माफी मांगी। संस्था ने आश्वासन दिया कि संशोधित संस्करण जल्द जारी किया जाएगा। हालांकि अदालत ने कहा कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाएगा और जांच की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, इस विवाद से पहले हुई कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि कक्षा 8 के बच्चों को किस प्रकार की सामग्री पढ़ाई जा रही है और इसकी निगरानी कौन कर रहा है। बताया जा रहा है कि सरकार ने इस मामले की समीक्षा के संकेत दिए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च, 2026 को तय की है। फिलहाल अदालत के सख्त रुख के बाद शिक्षा जगत और राजनीतिक हलकों में इस फैसले को लेकर व्यापक चर्चा जारी है।