जम्मू-कश्मीर के कॉलेजों से रातों-रात गायब हुईं 4,700 से ज्यादा किताबें: 518 प्रकाशनों पर बैन से मचा बवाल

Jammu Kashmir Book Ban: जम्मू-कश्मीर के कॉलेजों से 4,767 किताबें हटाई गईं और 518 प्रकाशनों पर बैन लगाया गया। सीएम उमर अब्दुल्ला ने फैसले पर उठाए सवाल, वहीं बीजेपी ने किया बचाव। जानिए क्या है पूरा विवाद।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 24 September 2026, 9:10 AM IST
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Srinagar: जम्मू-कश्मीर के कॉलेजों और सरकारी पुस्तकालयों से बड़ी संख्या में किताबें हटाए जाने और 518 प्रकाशनों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाए जाने के बाद घाटी में सियासी पारा चढ़ गया है। अवामी इत्तेहाद पार्टी के विधायक खुर्शीद अहमद शेख के सवाल पर विधानसभा में मिली जानकारी के मुताबिक, उच्च शिक्षा विभाग ने 21.81 लाख से अधिक किताबों की स्क्रीनिंग की।

इसके बाद कश्मीर से 4,474 और जम्मू से 293 मिलाकर कुल 4,767 किताबें हटा दी गईं। वहीं 1,752 किताबों का फैसला विशेषज्ञ समिति के पास लंबित है।

उमर अब्दुल्ला और मीरवाइज ने उठाए सवाल

किताबों पर इस बड़े प्रतिबंध के बाद राजनीतिक तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में किताबों को प्रतिबंधित करना सही नहीं है, लेकिन मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था में चुनी हुई सरकार के पास ऐसे फैसले लेने के अधिकार सीमित हैं।

उन्होंने वादा किया कि स्थितियां अनुकूल होते ही इस फैसले की समीक्षा की जाएगी। वहीं, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने इसे छात्रों की तार्किक सोच और अकादमिक स्वतंत्रता पर हमला बताया।

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सरकार और बीजेपी का बचाव

दूसरी ओर, मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने इस कार्रवाई को एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आपत्तिजनक सामग्री और राष्ट्र की संप्रभुता के खिलाफ लिखी गई किताबों को पुस्तकालयों में रखने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

भाजपा विधायक आरएस पठानिया और प्रदेश प्रवक्ता जोरवार सिंह जमवाल ने सरकार के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में इतिहास हमेशा तथ्यों और प्रामाणिक सबूतों के आधार पर पढ़ाया जाएगा, न कि मनगढ़ंत कहानियों या अफवाहों के आधार पर।

Location :  Srinagar

Published :  24 September 2026, 9:10 AM IST

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