
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Img: Dynamite News)
New Delhi: लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा से पहले सियासी माहौल गर्म हो गया है। कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने इस मुद्दे पर अपनी रणनीति तैयार कर ली है। पार्टी की ओर से राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल और गौरव गोगोई जैसे वरिष्ठ नेता सदन में सरकार का सामना करेंगे। विपक्ष का कहना है कि वह पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बनाने का विरोध नहीं कर रहा, बल्कि छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई, कथित पैलेट गन के इस्तेमाल और अत्यधिक बल प्रयोग जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब चाहता है। ऐसे में साफ संकेत हैं कि संसद में कानून से ज्यादा छात्र आंदोलन और सरकार की कार्रवाई पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि इस अहम बहस में उसके शीर्ष नेता सक्रिय भूमिका निभाएंगे। राहुल गांधी चर्चा की अगुवाई करेंगे, जबकि प्रियंका गांधी वाड्रा भी सदन में अपनी बात रखेंगी। इनके अलावा केसी वेणुगोपाल और लोकसभा में विपक्ष के उपनेता गौरव गोगोई भी सरकार से सवाल पूछेंगे। इंडिया गठबंधन के सूत्रों के मुताबिक विपक्ष की रणनीति दो हिस्सों में बंटी है। पहला, पेपर लीक रोकने के लिए प्रभावी कानून का समर्थन और दूसरा, छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार की जवाबदेही तय करना।
विपक्ष का कहना है कि परीक्षाओं में पारदर्शिता और पेपर लीक पर रोक लगाने वाले हर कदम का वह स्वागत करता है। लेकिन उसका आरोप है कि जब छात्र सड़कों पर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे, तब उनके खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि संसद में सार्थक चर्चा तभी हो सकती है जब सरकार पहले छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई पर अपना पक्ष स्पष्ट करे। विपक्ष का मानना है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे छात्रों के साथ हुए व्यवहार पर सरकार को जवाब देना चाहिए।
संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यालय में इंडिया गठबंधन के नेताओं की बैठक हुई। इस बैठक में लोकसभा और राज्यसभा के नेताओं ने दिनभर की रणनीति पर चर्चा की। सूत्रों के अनुसार बैठक में यह तय किया गया कि दोनों सदनों में विपक्ष एकजुट होकर सरकार को छात्र प्रदर्शन, पेपर लीक और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर घेरने की कोशिश करेगा। साथ ही सदन के भीतर विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर भी सहमति बनी।
केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया था। इस विधेयक का उद्देश्य पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली अनियमितताओं पर पहले से ज्यादा सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। प्रस्तावित संशोधन के तहत दोषियों के लिए न्यूनतम सजा तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष और अधिकतम सजा पांच वर्ष से बढ़ाकर दस वर्ष तक करने का प्रावधान किया गया है। सरकार का दावा है कि इससे पेपर लीक जैसे संगठित अपराधों पर प्रभावी रोक लगेगी और परीक्षाओं की विश्वसनीयता मजबूत होगी।
Location : New Delhi
Published : 28 July 2026, 3:01 PM IST