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वरिष्ठ वकील और भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे (Img: AI Generated)
New Delhi: भारत के कुछ विरोध-प्रदर्शनों को लेकर वरिष्ठ वकील और पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि कुछ आंदोलनों के पीछे विदेशी फंडिंग और बाहरी ताकतों की भूमिका हो सकती है। उन्होंने केंद्र सरकार से इन आरोपों की जांच करने और जरूरत पड़ने पर उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
हालांकि, विदेशी फंडिंग और बाहरी दखल से जुड़े इन दावों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।
एक इंटरव्यू में हरीश साल्वे ने कहा कि कुछ विदेशी देश भारत की तरक्की से खुश नहीं हैं। उन्होंने नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश में हुए राजनीतिक बदलावों का जिक्र करते हुए आशंका जताई कि इन घटनाओं में बाहरी ताकतों की भूमिका रही हो सकती है।
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साल्वे के मुताबिक, भारत में भी कुछ विरोध-प्रदर्शनों के पीछे बाहरी मदद होने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर सवाल उठाया कि कुछ प्रदर्शन आयोजित करने वाले लोगों के पास पैसा कहां से आ रहा है और इन गतिविधियों के लिए धन की व्यवस्था कैसे हो रही है।
हरीश साल्वे ने दावा किया कि पिछले छह से आठ महीनों के दौरान उन्हें कुछ गतिविधियों में एक खास पैटर्न नजर आया है। उन्होंने कहा कि कुछ यूट्यूबर्स और दूसरे लोग विरोध-प्रदर्शनों में प्रमुख भूमिका निभाते दिखाई दे रहे हैं। उनके अनुसार, इनमें कुछ ऐसे लोग भी हैं जो जर्मनी और अन्य देशों में रहते हैं।
साल्वे ने सवाल उठाया कि अगर इन गतिविधियों को बड़े स्तर पर आयोजित किया जा रहा है, तो उनके लिए आर्थिक मदद कहां से मिल रही है। हालांकि, उन्होंने जिन लोगों या समूहों का जिक्र किया, उनके खिलाफ विदेशी फंडिंग के आरोपों को साबित करने वाला कोई सार्वजनिक प्रमाण इस इंटरव्यू के आधार पर सामने नहीं आता।
साल्वे का कहना है कि विदेशी फंडिंग के आरोपों की जांच करना सरकार की जिम्मेदारी है। अगर जांच में नियमों के उल्लंघन या देश की व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिश के सबूत मिलते हैं, तो कानून के मुताबिक कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को ऐसे आंदोलनों को गंभीरता से लेना चाहिए, जिनका उद्देश्य उनके मुताबिक व्यवस्था को अस्थिर करना हो। साथ ही, उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इन मामलों की जांच करेगी।
हरीश साल्वे ने इन आंदोलनों को वास्तविक जन-आंदोलन मानने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उन्हें बड़े पैमाने पर जनता के विद्रोह के स्पष्ट संकेत नहीं दिखाई दिए। अपनी बात समझाने के लिए उन्होंने पेपर लीक जैसे मुद्दों पर हुए छात्र प्रदर्शनों का उदाहरण दिया, जिन्हें लोगों की सहानुभूति और समर्थन मिला था।
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उनके मुताबिक, जब किसी आंदोलन के पीछे आम लोगों की वास्तविक परेशानी होती है, तो उसे व्यापक समर्थन मिल सकता है। लेकिन मौजूदा विरोध-प्रदर्शनों को लेकर उनकी राय अलग है।
साल्वे ने कहा कि केंद्र सरकार आर्थिक विकास, तकनीकी प्रगति और देश की अंतरिक्ष क्षमताओं को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर काम कर रही है। उनके अनुसार, ऐसे समय में देश की व्यवस्था को प्रभावित करने वाली गतिविधियों की जांच जरूरी है।
Location : New Delhi
Published : 12 October 2026, 1:39 PM IST