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दुल्हन नहीं, दूल्हे की होती है विदाई फोटो सोर्स-डाइनामाइट न्यूज
New Delhi: भारत को विविधताओं का देश कहा जाता है और इसकी एक बड़ी वजह यहां की अनोखी सामाजिक परंपराएं हैं। आमतौर पर शादी के बाद बेटी अपने मायके को छोड़कर ससुराल जाती है, लेकिन देश के कुछ हिस्सों में सदियों पुरानी परंपरा इसके बिल्कुल उलट है। यहां शादी के बाद दुल्हन नहीं, बल्कि दूल्हे की विदाई होती है और उसे हमेशा के लिए पत्नी के घर जाकर बसना पड़ता है।
पूर्वोत्तर के पहाड़ी राज्य Meghalaya में रहने वाली गारो और खासी जनजातियों में मातृसत्तात्मक व्यवस्था आज भी कायम है। यहां परिवार और संपत्ति की उत्तराधिकारी बेटियां होती हैं, खासकर घर की सबसे छोटी बेटी। विवाह के बाद पति पत्नी के घर जाकर रहता है और परिवार की जिम्मेदारियों में भागीदारी निभाता है।
पितृसत्तात्मक समाज के बीच Damadanpurwa एक अनोखी मिसाल पेश करता है। यहां कई पीढ़ियों से बेटियों को विदा करने के बजाय दामाद को घर बुलाकर बसाने की परंपरा चली आ रही है। दामाद को जमीन और मकान तक सौंप दिए जाते हैं, जिसके चलते इस बस्ती की पहचान ही दामादों के गांव के रूप में बन गई।
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश के JamaiPura इलाके में यह परंपरा और भी बड़े स्तर पर दिखाई देती है। यहां 500 से अधिक परिवार ऐसे हैं, जहां शादी के बाद लड़के स्थायी रूप से ससुराल में रह रहे हैं। स्थानीय लोग इसे सामाजिक सहयोग और पारिवारिक एकता की परंपरा मानते हैं।
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मध्य प्रदेश के Pandhrakhedi गांव में शादी के बाद दामाद का पत्नी के घर रहना लगभग अनिवार्य माना जाता है। विवाह के कुछ दिन बाद ही बेटी अपने पति को साथ लेकर मायके लौट आती है और फिर दोनों वहीं जीवन बिताते हैं।
मध्य प्रदेश के Nimola गांव में घर-जमाई रखने की परंपरा करीब दो शताब्दियों से चली आ रही है। यहां मराठा, तड़वी, पठान और बौद्ध समुदाय के लोग इस व्यवस्था को आज भी निभा रहे हैं।
Location : New Delhi
Published : 17 June 2026, 5:05 PM IST
Topics : Bridegroom marriage Marriage Tradition india