
FCRA बिल को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन (Source: Google)
New Delhi: केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में पेश किए गए 'विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026' को लेकर देश में सियासी घमासान तेज हो गया है। जहां एक तरफ मोदी सरकार इसे विदेशी चंदे में पारदर्शिता लाने वाला एक बड़ा कदम बता रही है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे पूरी तरह 'असंवैधानिक' और 'अलोकतांत्रिक' करार दिया है। इस विवाद के बीच कांग्रेस ने अपने सभी सांसदों को तत्काल दिल्ली तलब किया, ताकि सदन में इस बिल का पुरजोर विरोध किया जा सके।
इस नए संशोधन विधेयक के जरिए सरकार विदेशी फंडिंग से चलने वाले एनजीओ (NGO) और सामाजिक संस्थानों पर अपना नियंत्रण और भी सख्त करना चाहती है। विवाद की सबसे मुख्य वजह एक 'नामित प्राधिकरण' (Designated Authority) बनाने का प्रस्ताव है, जिसे यह असीमित शक्ति दी जाएगी कि वह उन संस्थाओं की संपत्तियों और फंड को अपने कब्जे में ले सके जिनका रजिस्ट्रेशन रद्द हो चुका है या जिन्होंने इसे खुद सरेंडर कर दिया है।
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विपक्ष का आरोप है कि यह प्रावधान सरकार को ऐसी शक्तियां देता है जिससे वह किसी भी सामाजिक संगठन की मेहनत से खड़ी की गई संपत्ति को आसानी से जब्त कर सकेगी, जो लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा है।
संसद के बाहर विपक्षी सांसदों ने नई FCRA नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। #FCRAProtest #Opposition #NGOImpact #ParliamentNews #IndiaPolitics @INCIndia @samajwadiparty pic.twitter.com/VeaWsXSWhV
— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) April 1, 2026
कांग्रेस पार्टी ने आज 1 अप्रैल 2026 को सुबह 10:30 बजे संसद भवन के बाहर इस बिल के खिलाफ एक बड़े विरोध प्रदर्शन का आगाज किया। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल का कहना है कि सरकार इस बिल को ऐसे समय में जानबूझकर लाई है जब कई राज्यों के सांसद आगामी विधानसभा चुनावों के प्रचार में व्यस्त हैं।
वेणुगोपाल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह बिल विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर केरल के ईसाई संस्थानों और अन्य धर्मार्थ संगठनों को डराने और उन पर सरकारी शिकंजा कसने की एक सोची-समझी कोशिश है। कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस बिल को किसी भी कीमत पर संसद से पास नहीं होने देंगे।
इस पूरे मामले पर सरकार का रुख बेहद कड़ा है और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद में साफ किया कि यह बिल उन लोगों के लिए वाकई बड़ी मुश्किल पैदा करेगा जो विदेशी चंदे का इस्तेमाल जबरन धर्मांतरण या राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए करते हैं।
सरकार के अनुसार इस कानून का एकमात्र मकसद यह सुनिश्चित करना है कि विदेशों से आने वाला पैसा देश की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ इस्तेमाल न हो सके।
Location : New Delhi
Published : 1 April 2026, 12:42 PM IST