FCRA Amendment Bill Protest: संसद के बाहर विपक्ष का बड़ा प्रदर्शन, जानें क्यों जता रहे विरोध?

लोकसभा में पेश किए गए विदेशी अंशदान संशोधन विधेयक 2026 को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। जहां सरकार इसे पारदर्शिता के लिए जरूरी बता रही है, वहीं विपक्षी दलों ने इसके प्रावधानों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 1 April 2026, 12:42 PM IST

New Delhi: केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में पेश किए गए 'विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026' को लेकर देश में सियासी घमासान तेज हो गया है। जहां एक तरफ मोदी सरकार इसे विदेशी चंदे में पारदर्शिता लाने वाला एक बड़ा कदम बता रही है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे पूरी तरह 'असंवैधानिक' और 'अलोकतांत्रिक' करार दिया है। इस विवाद के बीच कांग्रेस ने अपने सभी सांसदों को तत्काल दिल्ली तलब किया, ताकि सदन में इस बिल का पुरजोर विरोध किया जा सके।

FCRA संशोधन बिल पर इतना विवाद क्यों?

इस नए संशोधन विधेयक के जरिए सरकार विदेशी फंडिंग से चलने वाले एनजीओ (NGO) और सामाजिक संस्थानों पर अपना नियंत्रण और भी सख्त करना चाहती है। विवाद की सबसे मुख्य वजह एक 'नामित प्राधिकरण' (Designated Authority) बनाने का प्रस्ताव है, जिसे यह असीमित शक्ति दी जाएगी कि वह उन संस्थाओं की संपत्तियों और फंड को अपने कब्जे में ले सके जिनका रजिस्ट्रेशन रद्द हो चुका है या जिन्होंने इसे खुद सरेंडर कर दिया है।

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विपक्ष का आरोप है कि यह प्रावधान सरकार को ऐसी शक्तियां देता है जिससे वह किसी भी सामाजिक संगठन की मेहनत से खड़ी की गई संपत्ति को आसानी से जब्त कर सकेगी, जो लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा है।

कांग्रेस पार्टी ने आज 1 अप्रैल 2026 को सुबह 10:30 बजे संसद भवन के बाहर इस बिल के खिलाफ एक बड़े विरोध प्रदर्शन का आगाज किया। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल का कहना है कि सरकार इस बिल को ऐसे समय में जानबूझकर लाई है जब कई राज्यों के सांसद आगामी विधानसभा चुनावों के प्रचार में व्यस्त हैं।

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वेणुगोपाल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह बिल विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर केरल के ईसाई संस्थानों और अन्य धर्मार्थ संगठनों को डराने और उन पर सरकारी शिकंजा कसने की एक सोची-समझी कोशिश है। कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस बिल को किसी भी कीमत पर संसद से पास नहीं होने देंगे।

विदेशी चंदे का इस्तेमाल अब सुरक्षित?

इस पूरे मामले पर सरकार का रुख बेहद कड़ा है और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद में साफ किया कि यह बिल उन लोगों के लिए वाकई बड़ी मुश्किल पैदा करेगा जो विदेशी चंदे का इस्तेमाल जबरन धर्मांतरण या राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए करते हैं।

सरकार के अनुसार इस कानून का एकमात्र मकसद यह सुनिश्चित करना है कि विदेशों से आने वाला पैसा देश की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ इस्तेमाल न हो सके।

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  • New Delhi

Published : 
  • 1 April 2026, 12:42 PM IST