देवघर पहुंची विधानसभा की लोक लेखा समिति, सरकारी खर्च का हिसाब होगा हिसाब-किताब

झारखंड विधानसभा की लोक लेखा समिति देवघर पहुंची है। पुरानी ऑडिट रिपोर्टों में दर्ज वित्तीय मामलों और लंबित आपत्तियों की मौजूदा स्थिति पर अब निगाहें टिकी हैं।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 25 October 2026, 4:10 PM IST
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Deoghar: झारखंड विधानसभा की लोक लेखा समिति के देवघर पहुंचने के बाद सरकारी खर्च और वर्षों से लंबित ऑडिट आपत्तियों को लेकर सवाल फिर चर्चा में हैं। समिति के अध्यक्ष मनोज कुमार यादव समेत सदस्यों का परिसदन में स्वागत किया गया, लेकिन विभागवार समीक्षा और पुराने वित्तीय मामलों की मौजूदा स्थिति को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में निगाह इस बात पर है कि समिति का दौरा सरकारी खर्च की जवाबदेही से जुड़े सवालों के ठोस जवाब भी सामने लाएगा या नहीं।

धनबाद की समीक्षा के बाद देवघर पर नजर

रविवार, 25 अक्टूबर को समिति के अध्यक्ष मनोज कुमार यादव और सदस्य अमित कुमार यादव, जगत मांझी तथा नमन विक्सल कोंगाड़ी देवघर पहुंचे। परिसदन में उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी सौरभ कुमार भुवानिया, पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर और उप विकास आयुक्त ने उनका स्वागत किया। हालांकि, जारी सूचना में समिति के समीक्षा एजेंडे, लंबित ऑडिट मामलों और आगे के कार्यक्रम का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया। इससे एक दिन पहले, 24 अक्टूबर को धनबाद में समिति ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की थी।

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पुरानी ऑडिट रिपोर्टों में दर्ज हैं वित्तीय सवाल

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की 2024 की झारखंड संबंधी रिपोर्ट में देवघर नगर निगम से जुड़ा एक मामला दर्ज है। रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2022 तक एक संविदाकार को दिए गए 1.47 करोड़ रुपये के मोबिलाइजेशन एडवांस में से नौ लाख रुपये की वसूली बाकी थी। संबंधित बैंक गारंटी दिसंबर 2018 में समाप्त हो गई थी। हालांकि, यह पुरानी रिपोर्ट में दर्ज स्थिति है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि राशि आज भी बकाया है।

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देवघर पहुंची विधानसभा की लोक लेखा समिति (IMG: Dynamite News)

इसी तरह, मई 2022 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में महालेखाकार की जांच के हवाले से 31 अगस्त 2021 तक देवघर जिले में विभिन्न मदों के तहत करीब 7.40 करोड़ रुपये के असमायोजित अग्रिम वाउचर का उल्लेख किया गया था। असमायोजित राशि अपने आप में गबन का प्रमाण नहीं होती, लेकिन उसका नियमानुसार हिसाब और समायोजन जरूरी है।

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जनता के पैसे का हिसाब कितना स्पष्ट?

देवघर में नगर निगम की नागरिक सुविधाओं, सड़क, भवन, पेयजल, बिजली, खनन और विकास योजनाओं पर सरकारी धन खर्च होता है। ऐसे में यह जानना अहम है कि जिले के विभिन्न विभागों में कितनी ऑडिट आपत्तियां लंबित हैं, कितनों का निपटारा हो चुका है और किन मामलों में जवाब या कार्रवाई बाकी है। फिलहाल समिति के देवघर दौरे के दौरान किन मामलों की समीक्षा होगी, इसे लेकर तस्वीर स्पष्ट नहीं है। मीडिया से संवाद और विस्तृत समीक्षा एजेंडे की जानकारी भी सामने नहीं आई है।

Location :  Deoghar

Published :  25 October 2026, 4:09 PM IST

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