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देवघर डाक मंडल की अनूठी पहल (सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)
Deoghar: तकनीक के इस दौर में जहाँ वीडियो कॉल, व्हाट्सएप मैसेज और सोशल मीडिया पोस्ट ने हजारों किलोमीटर की दूरियों को समेट दिया है, वहीं रिश्तों की वह पारंपरिक गर्माहट कहीं खो सी गई है। मोबाइल स्क्रीन के इस दौर में हाथों से लिखी चिट्ठियों और खुद से तैयार की गई राखी के अहसास को पुनर्जीवित करने के लिए देवघर डाक मंडल ने एक बेहद भावुक और सराहनीय कदम उठाया है। इस बार रक्षाबंधन पर डाकिया सिर्फ सरकारी कागज या चिट्ठियाँ नहीं, बल्कि भाई-बहन के अटूट प्यार और भावनाओं की डोर लेकर बहनों के घर तक पहुँचेगा।
इस अनूठे अभियान की सबसे खूबसूरत कड़ी देश की भावी पीढ़ी यानी बच्चों को माना गया है। देवघर डाक मंडल द्वारा विभिन्न स्कूलों में 'राखी बनाओ और भेजो' प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को केवल प्रतियोगिता में शामिल करना नहीं, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों से रूबरू कराना है। बच्चे स्कूल परिसर में ही अपने हाथों से सुंदर राखियाँ तैयार करेंगे और डिजिटल संदेशों से इतर, अपने हाथों से भेजे गए प्रेम की असली मिठास को महसूस करेंगे।
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प्रतियोगिता में भाग लेने वाले बच्चों के उत्साह को बढ़ाने के लिए डाक विभाग ने विशेष तैयारी की है। इस अभियान के तहत प्रत्येक विद्यालय से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले चयनित प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र दिए जाएँगे। इसके अलावा, पूरे देवघर डाक मंडल स्तर पर सर्वश्रेष्ठ स्थान पाने वाले विद्यार्थियों को विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा, जो उनकी रचनात्मकता और संस्कारों को एक नई पहचान देगा।
अभिभावकों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए डाक विभाग ने एक बेहतरीन व्यवस्था की है। बच्चों द्वारा बनाई गई राखियों को भेजने के लिए माता-पिता या बच्चों को अलग से डाकघर के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। डाक विभाग की टीम स्वयं स्कूल परिसर में मौजूद रहकर स्पीड पोस्ट की सुविधा उपलब्ध कराएगी, जहाँ से राखियाँ सीधे अपने गंतव्य के लिए रवाना हो सकेंगी।
डाक विभाग ने इस पूरे सफर को बेहद किफायती और पारदर्शी बनाया है। मात्र 70 रुपये के कुल शुल्क में बहन का प्यार भाई तक सुरक्षित पहुँचेगा। ये शुल्क इस प्रकार है-
विशेष वाटरप्रूफ लिफाफा: 10 रुपये
स्पीड पोस्ट शुल्क: 55 रुपये
अभियान संचालन व अन्य व्यवस्थाएं: 5 रुपये
सावन के महीने में अक्सर तेज बारिश के कारण राखियों के भीगने या खराब होने का डर बना रहता है। बहनों की इसी चिंता को दूर करने के लिए डाक विभाग ने इस बार विशेष 'वॉटरप्रूफ' (जलरोधी) लिफाफों का इंतजाम किया है। अब रास्ते में चाहे कितनी भी बारिश क्यों न हो, बहन की दुआओं से सजी राखी पूरी तरह सुरक्षित और ससम्मान भाई की कलाई तक पहुँचेगी।
रक्षाबंधन के त्योहार पर डाकघरों में होने वाली भारी भीड़ को देखते हुए देवघर डाक मंडल के प्रधान डाकघर, सभी उपडाकघरों और शाखा डाकघरों में विशेष काउंटर्स स्थापित किए जा रहे हैं। इन काउंटरों पर केवल राखियों की त्वरित बुकिंग और प्रेषण का कार्य होगा। इसके साथ ही, राखियों को प्राथमिकता के आधार पर समय से पहुँचाने के लिए एक 'विशेष डिलीवरी टीम' का भी गठन किया गया है।
एक दौर था जब डाकिए की साइकिल की घंटी सुनते ही पूरा परिवार दौड़ पड़ता था। डिजिटल युग ने गति भले ही बढ़ा दी हो, लेकिन लिफाफे को खोलने की जो उत्सुकता और खुशी होती है, उसका कोई मुकाबला नहीं है। देवघर डाक मंडल की यह पहल केवल एक सरकारी सेवा नहीं, बल्कि हमारी टूटती पारंपरिक संस्कृति को फिर से मजबूत करने का एक सार्थक प्रयास है। रक्षाबंधन का असली मतलब सिर्फ कलाई पर रशमी धागा बांधना नहीं, बल्कि जीवनभर साथ निभाने का वो विश्वास है, जो इस बार समय पर भाई के चेहरे पर मुस्कान बनकर बिखरेगा।
Location : Deoghar
Published : 9 July 2026, 4:33 PM IST