
प्रतीकात्मक छवि (Source: Pinterest)
New Delhi: दिल्ली में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सरकार और नगर निगम ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार 48 प्रदूषण हॉटस्पॉट पर विशेष निगरानी के साथ 334 दलों को मैदान में उतारा जाएगा। हालांकि प्रदूषण नियंत्रण की इस पूरी कवायद की असली परीक्षा सर्दी शुरू होने से पहले तय उपायों को जमीन पर लागू करने की होगी।
सरकार की नई व्यवस्था के तहत दिल्ली के 39 उपमंडलों में दो-दो निगरानी दल तैनात किए गए हैं। इसके अलावा एमसीडी के वार्ड स्तर पर 250 दल, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद क्षेत्र में चार और दिल्ली छावनी क्षेत्र में दो दल काम करेंगे।
इन टीमों की जिम्मेदारी कूड़ा और जैविक सामग्री जलाने, निर्माण से निकलने वाली धूल, औद्योगिक प्रदूषण, अवैध कूड़ा डालने और नियमों के खिलाफ ईंधन इस्तेमाल पर नजर रखना होगी। 48 हॉटस्पॉट पर विशेष निगरानी के साथ प्रत्येक क्षेत्र की जिम्मेदारी भी तय की गई है।
सड़क की धूल को कम करने के लिए सरकार ने 100 करोड़ रुपये की लागत से 1000 ट्रक आधारित धूल-रोधी मशीनें तीन साल तक चलाने की योजना मंजूर की है। इन वाहनों में जीपीएस और रोजाना किए गए काम का रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था प्रस्तावित है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ पानी का छिड़काव प्रदूषण कम करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। सड़क की नियमित यांत्रिक सफाई, सड़क किनारों की सफाई और खुले हिस्सों को पक्का या हरित करना भी जरूरी होगा।
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एमसीडी ने 870 किलोमीटर सड़क का काम 31 अक्टूबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। लेकिन 14 सितंबर तक संशोधित 1230 किलोमीटर के लक्ष्य में 689 किलोमीटर का काम ही पूरा हुआ था। ऐसे में सर्दियों से पहले बाकी काम पूरा करना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
एमसीडी ने कूड़ा संग्रह और परिवहन व्यवस्था मजबूत करने, खुले में कूड़ा जलाने पर रोक और निर्माण-विध्वंस कचरा स्थलों पर निगरानी बढ़ाने की भी योजना बताई है। 125 ऐसे स्थलों में से 110 को नियमों के अनुरूप बताया गया है।
सीएसई के विश्लेषण के मुताबिक सर्दियों में दिल्ली का प्रदूषण किसी एक स्रोत से नहीं बढ़ता। वाहन, उद्योग, कूड़ा जलाना, घरेलू ईंधन, निर्माण गतिविधियां और क्षेत्रीय प्रदूषण मिलकर स्थिति को प्रभावित करते हैं। इसलिए अलग-अलग स्रोतों पर एक साथ कार्रवाई जरूरी है।
आइआइटी दिल्ली और टेरी से जुड़े 2026 के अध्ययन में दिल्ली के पीएम 2.5 प्रदूषण में परिवहन क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 18-24 प्रतिशत बताई गई है। ऐसे में भारी वाहनों, यातायात प्रबंधन और सार्वजनिक परिवहन पर भी ध्यान देना होगा।
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सीपीसीबी के पूर्व अपर निदेशक डॉ. एसके त्यागी ने प्रभावी अमल के लिए प्रत्येक हॉटस्पॉट पर एक जिम्मेदार अधिकारी की तैनाती, रोजाना निरीक्षण और सार्वजनिक निगरानी पर जोर दिया है। कूड़ा जलाने और निर्माण नियमों के उल्लंघन पर केवल नोटिस के बजाय समयबद्ध कार्रवाई और दोबारा उल्लंघन पर दंड की जरूरत भी बताई गई है।
केंद्र सरकार भी मई में दिल्ली के साथ बैठक में सड़क धूल नियंत्रण, यातायात प्रबंधन, इलेक्ट्रिक वाहनों और कचरा प्रबंधन से जुड़े उपायों में तेजी तथा विभागों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत जता चुकी है।
Location : New Delhi
Published : 27 September 2026, 8:05 AM IST
Topics : Air Pollution Air quality Delhi News Delhi Pollution MCD