रोजाना 30 सिगरेट पीने जैसा है दिल्ली का प्रदूषण, सुप्रीम कोर्ट में CJI Suryankant ने सरकार से पूछे तीखे सवाल

दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने पराली प्रबंधन, किसानों को मशीनें देने और निजी वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर सवाल उठाए। जानिए अदालत में क्या-क्या हुआ।

Post Published By: Rohit Goyal
Updated : 6 November 2026, 3:05 PM IST

New Delhi: पिछली कई सर्दियो की शुरुआत दिल्लीवालों के लिए दमधोटू हाव के साथ होती है और बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अहम सुनवाई की। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने प्रदूषण की गंभीर स्थिति और इससे निपटने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर सवाल किए।

वरिष्ठ अधिवक्ता और न्याय मित्र अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि दिल्ली में प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी के आसपास बना हुआ है। उन्होंने स्थिति की गंभीरता समझाते हुए कहा कि यहां की हवा में सांस लेना ऐसा है, जैसे कोई व्यक्ति रोजाना 30 सिगरेट पी रहा हो। वहीं, सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि उम्मीद है कि आप सभी दिल्ली के मौसम का आनंद ले रहे होंगे। सुनवाई के दौरान अदालत ने पराली प्रबंधन, परिवहन से होने वाले प्रदूषण और निजी वाहनों की भूमिका पर भी चिंता जताई।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR के प्रदूषण पर जताई चिंता

दिल्ली में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। इस मामले की सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि 5 नवंबर को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान 14 प्रतिशत था।

उन्होंने कहा कि दिल्ली पहले से ही प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है और पराली जलाने से स्थिति और गंभीर हो जाती है। उनके मुताबिक, दिल्ली-NCR में परिवहन भी प्रदूषण का एक बड़ा कारण है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर होने वाले प्रदूषण और पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए गंभीर प्रयास करने की जरूरत है।

इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि बारिश के कारण प्रदूषण का स्तर कुछ नीचे आया था। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि किसान अब अगली फसल की बुवाई की तैयारी में जुटेंगे और पराली जलाने की गतिविधियां रुक गई होंगी।

पराली खरीदने की दर पहले से अधिसूचित करने का सुझाव

सुनवाई के दौरान पराली प्रबंधन को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि किसानों को पराली प्रबंधन के लिए मशीनें उपलब्ध कराने के बावजूद कई किसानों के सामने आर्थिक समस्याएं हैं। कुछ किसानों के पास मशीनें चलाने के लिए ईंधन खरीदने तक के पैसे नहीं हैं। इसके अलावा, छोटे खेतों में इन मशीनों का इस्तेमाल करना भी व्यावहारिक रूप से मुश्किल होता है।

इस पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि अधिकारियों की ओर से एक निश्चित दर पर किसानों से पराली खरीदने का प्रस्ताव दिया गया था। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

सीजेआई सूर्यकांत ने सुझाव दिया कि पराली खरीदने की दर पहले ही अधिसूचित की जानी चाहिए, ताकि किसानों को इसके बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा कि पराली प्रबंधन की मशीनें ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराई जानी चाहिए। व्यक्तिगत किसानों के लिए इन मशीनों को खरीदना और उनका खर्च उठाना मुश्किल है, क्योंकि इनकी कीमत काफी अधिक होती है।

CJI बोले- केवल बयानबाजी से नहीं निकलेगा समाधान

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अदालत में एक आधिकारिक चार्ट भी प्रस्तुत किया गया। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने चार्ट में पीले रंग से दिखाए गए हिस्से के बारे में जानकारी मांगी। उन्होंने कहा कि पराली जलाने को लेकर केवल बयान देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए किसानों के बीच जागरूकता और शिक्षा पर ध्यान देना जरूरी है।

सीजेआई ने कहा कि किसानों को पराली के आर्थिक महत्व और उससे होने वाले फायदों के बारे में समझाना होगा। यदि किसानों को यह पता चलेगा कि पराली को जलाने के बजाय अपने पास रखने से उन्हें आर्थिक लाभ हो सकता है तो वे इसे जलाने से बच सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआत में कुछ किसान इस व्यवस्था को अपनाने के लिए तैयार नहीं होंगे, लेकिन इस प्रक्रिया में समय लगेगा।

निजी वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर भी उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने प्रदूषण के लिए केवल पराली जलाने को जिम्मेदार मानने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या दिल्ली-NCR में प्रदूषण की समस्या के लिए सिर्फ पराली जलाना जिम्मेदार है या फिर अभिजात्य वर्ग और उनके निजी वाहनों से होने वाला प्रदूषण भी इसमें बड़ी भूमिका निभाता है।

अदालत की इस टिप्पणी के साथ परिवहन और निजी वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर भी ध्यान केंद्रित हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए केवल पराली जलाने पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्थानीय प्रदूषण और परिवहन से होने वाले उत्सर्जन पर भी प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।

Location :  New Delhi

Published :  6 November 2026, 1:16 PM IST