मिडिल ईस्ट संकट के चलते ईंधन आपूर्ति पर दबाव के बीच केंद्र सरकार ने कमर्शियल LPG का आवंटन 50% से बढ़ाकर 70% कर दिया है। इस फैसले से स्टील, ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल जैसे श्रम-प्रधान उद्योगों को सीधी राहत मिलेगी। पहले राज्यों को केवल 40-50% कोटा मिल रहा था, जिसे अब बढ़ाया गया है।

कमर्शियल एलपीजी (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
New Delhi: मिडिल ईस्ट संकट के चलते ईंधन आपूर्ति पर दबाव के बीच केंद्र सरकार ने उद्योगों को राहत देते हुए कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई बढ़ा दी है। अब राज्यों को संकट-पूर्व स्तर का 70% तक एलपीजी आवंटन मिलेगा। जिससे कई श्रम-प्रधान सेक्टरों को सीधी मदद मिलेगी।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने गैर-घरेलू एलपीजी के आवंटन में बड़ा इजाफा करते हुए इसे 70% तक बहाल करने का फैसला लिया है। 27 मार्च 2026 को पेट्रोलियम सचिव डॉ नीरज मित्तल द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे गए पत्र में जानकारी दी गई। इससे पहले उद्योगों को केवल 50% आवंटन मिल रहा था। जिसमें अब 20% अतिरिक्त जोड़ दिया गया है।
यह फैसला मार्च महीने में जारी 16, 18 और 21 तारीख के निर्देशों के बाद लिया गया है। शुरुआत में राज्यों को संकट-पूर्व कोटे का 40% दिया गया था जबकि अतिरिक्त 10% आवंटन को पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को बढ़ावा देने वाले सुधारों से जोड़ा गया था। कई राज्यों ने इन शर्तों को पूरा कर पहले ही अतिरिक्त कोटा हासिल कर लिया है।
सरकार का नया 20% अतिरिक्त आवंटन खासतौर पर स्टील, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, पेंट, केमिकल और प्लास्टिक जैसे श्रम-प्रधान उद्योगों को प्राथमिकता देगा। ये वे सेक्टर हैं जो विशेष हीटिंग प्रक्रियाओं के लिए एलपीजी पर निर्भर हैं और फिलहाल प्राकृतिक गैस पर स्विच करना उनके लिए आसान नहीं है।
सरकार ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि उद्योग पंजीकरण मानदंडों का पालन करें और जहां संभव हो, वहां PNG कनेक्शन के लिए आवेदन करें। साथ ही प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पाद वितरण आदेश 2026 को तेजी से लागू करने और सुधार-लिंक्ड शेष आवंटन का लाभ उठाने के लिए भी कहा गया है।
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इस फैसले से उन उद्योगों को राहत मिलेगी जो पिछले कुछ हफ्तों से कच्चे माल और ईंधन की कमी से जूझ रहे थे। उत्पादन लागत पर दबाव कुछ कम हो सकता है और सप्लाई चेन में आई रुकावट भी धीरे-धीरे सुधरने की उम्मीद है।