क्या बोस्टन से पाकिस्तान तक जुड़े हैं CJP आंदोलन के तार? सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर ‘कॉकरोच इज बैक’ की मिस्ट्री

सीजेपी के संसद मार्च में पाकिस्तान कनेक्शन और एआई-संचालित टूलकिट साजिश का पर्दाफाश हुआ है। विदेशी फंडिंग, बॉट्स और फर्जी दावों की जांच कर रही सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर बोस्टन यूनिवर्सिटी से लौटे संस्थापक और विपक्षी दलों का नेटवर्क है। आखिर क्या है पूरी सच्चाई?

Updated : 21 July 2026, 8:24 AM IST
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New Delhi: दिल्ली की सड़कों पर अचानक भड़की अराजकता और 'संसद मार्च' के उग्र रूप लेने के पीछे एक बड़े अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र का खुलासा हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों की शुरुआती जांच में इस पूरे आंदोलन के पीछे पाकिस्तान का कनेक्शन, विदेशी फंडिंग और एक सोची-समझी 'टूलकिट' साजिश का एंगल सामने आया है। अब खुफिया एजेंसियां इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही हैं कि आखिर सोशल मीडिया पर महज एक 'व्यंग्य' (Satire) के रूप में शुरू हुआ ऑनलाइन पेज कुछ ही दिनों में दिल्ली में भारी लाठीचार्ज और हिंसा की मुख्य वजह कैसे बन गया।

बाहरी तत्व, फर्जी मौत के दावे और पाकिस्तान से संचालित हैंडल्स

पुलिस सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए कई लोग छात्र थे ही नहीं, जिससे हिंसा में बाहरी तत्वों की संलिप्तता का शक पुख्ता हो गया है। जांच अधिकारियों ने खुलासा किया है कि सोशल मीडिया पर अफवाहें और भ्रामक जानकारी फैलाने के लिए कुछ ऐसे संदिग्ध हैंडल्स का सहारा लिया गया, जो कथित तौर पर पाकिस्तान से चलाए जा रहे थे।

इन पाकिस्तानी हैंडल्स के जरिए झूठा नैरेटिव गढ़ा गया कि हिंसा में 7 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, 391 लोग घायल हुए हैं और 250 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

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बोट्स, AI टूल्स और 'कॉकरोच इज बैक' का डिजिटल जाल

इस पूरे मार्च को हवा देने के लिए इंस्टाग्राम और एक्स (X) का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। सीजेपी के मुख्य इंस्टाग्राम हैंडल ने कुछ ही दिनों में 2 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स बटोरे, जिसने देश की स्थापित राजनीतिक पार्टियों को भी पीछे छोड़ दिया। विशेषज्ञों का साफ मानना है कि बिना 'पेड बोट्स' या 'विदेशी रीच' के इतनी तेजी से लाखों युवाओं को जोड़ना सामान्य बात नहीं है।

जब केंद्र सरकार के आदेश पर सीजेपी के आधिकारिक एक्स (X) हैंडल को ब्लॉक किया गया, तो महज कुछ ही मिनटों में 'कॉकरोच इज बैक' नाम से एक नई आईडी बना ली गई। सोमवार तक इस आईडी को फॉलो करने वालों की संख्या 3 लाख से ऊपर निकल गई, जबकि इंस्टाग्राम पेज के फॉलोअर्स 2 करोड़ 30 लाख के पार पहुंच गए। जांच में यह भी सामने आया है कि युवाओं को भड़काने के लिए इस आंदोलन के घोषणापत्र, वेबसाइट और पोस्टरों को बनाने में 'चैटजीपीटी' और 'क्लॉड' जैसे आधुनिक एआई टूल्स का संगठित तरीके से इस्तेमाल किया गया था।

बोस्टन यूनिवर्सिटी, बांग्लादेश मॉडल और विदेशी फंडिंग का सच

सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर अब सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके भी हैं, जो हाल ही में अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करके भारत लौटे हैं। एजेंसियां इस बात की जांच में जुट गई हैं कि क्या इस डिजिटल मूवमेंट को विदेश से वित्तीय (Funding) या लॉजिस्टिक सपोर्ट मिल रहा है? ठीक वैसा ही पैटर्न तलाशा जा रहा है, जैसा हाल के दिनों में बांग्लादेश और नेपाल के छात्र आंदोलनों में देखने को मिला था।

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विपक्ष और वामपंथी संगठनों पर सरकार विरोधी माहौल बनाने के आरोप

नीट (NEET) पेपर लीक के विरोध और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर 20 जून से जंतर-मंतर पर शुरू हुआ यह कथित गैर-राजनीतिक प्रदर्शन अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है। आरोप हैं कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) जैसी विपक्षी पार्टियों ने इसे सरकार विरोधी माहौल तैयार करने के मोहरे की तरह इस्तेमाल किया। इसके साथ ही, एसएफआई (SFI), आइसा (AISA), एआईएसएफ (AISF), बापसा (BAPSA) और क्रांतिकारी युवा संगठन जैसे वामपंथी छात्र संगठन भी इस प्रदर्शन को भड़काने में पूरी तरह सक्रिय रहे हैं। फिलहाल, पुलिस सभी मुख्य हैंडल्स और आईपी एड्रेस की बारीकी से ट्रैकिंग कर रही है।

Location :  New Delhi

Published :  21 July 2026, 8:24 AM IST

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