नेवेली में दो दिन माइन क्लोजर पर चला बड़ा मंथन, जानिये खनन के भविष्य को लेकर क्या बनी नई दिशा?

नेवेली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में माइन क्लोजर और रिपर्पजिंग पर व्यापक मंथन हुआ। केंद्रीय मंत्री और कोयला मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में सतत खनन, पर्यावरण संरक्षण और समुदाय-केंद्रित विकास मॉडल पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए गए।

Post Published By: सौम्या सिंह
Updated : 24 February 2026, 6:54 PM IST

New Delhi: एनएलसी इंडिया लिमिटेड द्वारा आयोजित दो-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला 'मूविंग बियॉन्ड एक्सट्रैक्शन: माइन क्लोजर एंड रिपर्पजिंग' का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। खनन क्षेत्र में सतत विकास, वैज्ञानिक माइन क्लोजर और खदानों के पुनर्प्रयोजन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित इस कार्यशाला में देशभर से वरिष्ठ विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं और सार्वजनिक क्षेत्र की खनन कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

राष्ट्रीय कार्यशाला में उठे कई अहम सवाल

कार्यशाला का उद्घाटन केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री किशन रेड्डी ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि माइन क्लोजर की रूपरेखा खनन कार्य के प्रारंभिक चरण से ही तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि खदान बंदी केवल औपचारिक प्रक्रिया न होकर पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय समुदायों के पुनर्वास और भविष्य की आर्थिक संभावनाओं के सृजन का माध्यम बननी चाहिए।

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मंत्री ने वैज्ञानिक योजना, पारदर्शिता और समुदाय सहभागिता को माइन क्लोजर नीति का अभिन्न हिस्सा बताते हुए कहा कि सतत खनन ही देश के दीर्घकालिक विकास की कुंजी है।

माइन क्लोजर पर क्या होगा अगला बड़ा कदम?

कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त ने कार्यशाला को दूरदर्शी पहल बताते हुए कहा कि बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य में माइन रिपर्पज़िंग की अवधारणा अत्यंत प्रासंगिक हो गई है। उन्होंने कहा कि खदानों के बंद होने के बाद उनके पुनर्प्रयोजन के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है।

एक्सट्रैक्शन से आगे की सोच पर जुटे दिग्गज (फोटो सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)

उन्होंने समुदाय-केन्द्रित विकास मॉडल पर जोर देते हुए कहा कि माइन क्लोजर की प्रक्रिया में सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन और स्थानीय सहभागिता सुनिश्चित करना आवश्यक है।

दूरदर्शी पहल के रूप में उभरी कार्यशाला

कार्यक्रम में भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने भी सक्रिय सहभागिता दर्ज की। उन्होंने खनन क्षेत्रों में सतत विकास, पर्यावरणीय संतुलन और सामाजिक दायित्वों के निर्वहन के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

दो दिनों तक चली इस कार्यशाला में माइन क्लोजर नीति, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन, समुदाय भागीदारी, पुनर्प्रयोजन मॉडल तथा अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं पर विस्तृत पैनल चर्चाएँ आयोजित की गईं। विशेषज्ञों ने विभिन्न राज्यों के अनुभव साझा करते हुए भविष्य की चुनौतियों और संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।

बीसीसीएल सीएमडी ने दर्ज कराई सक्रिय सहभागिता (फोटो सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)

बीसीसीएल की सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में कोयला मंत्रालय एवं कोल इंडिया के वरिष्ठ अधिकारी, बीसीसीएल सहित अन्य केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (सीपीएसई) के प्रतिनिधिगण तथा टीएमसीपी माइंस, बीसीसीएल के नोडल अधिकारी उपस्थित रहे।

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यह राष्ट्रीय कार्यशाला माइन क्लोजर और सतत खनन के क्षेत्र में ज्ञान-विनिमय तथा सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने का महत्वपूर्ण मंच साबित हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की पहलें न केवल नीतिगत स्पष्टता प्रदान करती हैं, बल्कि खनन उद्योग को पर्यावरणीय और सामाजिक उत्तरदायित्व की दिशा में ठोस कदम उठाने के लिए प्रेरित करती हैं।

कार्यशाला के समापन के साथ यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरा कि भविष्य का खनन मॉडल केवल संसाधन दोहन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, सामुदायिक विकास और दीर्घकालिक आर्थिक पुनर्संरचना को समान प्राथमिकता देगा।

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  • New Delhi

Published : 
  • 24 February 2026, 6:54 PM IST