
8th Pay Commission को लेकर अपडेट (Img: AI Generated Image)
New Delhi: 8वें वेतन आयोग ने वेतन और पेंशन संशोधन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए राज्यों में कर्मचारियों और पेंशनर्स से बातचीत का नया दौर शुरू कर दिया है। इसी क्रम में 6 जुलाई 2026 से ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में दो दिवसीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स से उनके अनुभव और सुझाव लिए गए।
इन बैठकों में वेतन, भत्ते, पेंशन और कार्य परिस्थितियों जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है। आयोग का उद्देश्य हर वर्ग की वास्तविक जरूरतों को समझकर एक संतुलित सिफारिश तैयार करना है।
भुवनेश्वर के बाद आयोग का अगला दौर 9 और 10 जुलाई को कोलकाता में प्रस्तावित है। इससे पहले जून में लखनऊ में भी कर्मचारियों के साथ विस्तृत चर्चा की जा चुकी है। लगातार हो रही इन बैठकों से साफ है कि आयोग किसी जल्दबाजी में नहीं बल्कि सभी पक्षों की राय लेकर आगे बढ़ना चाहता है।
इस पूरे प्रक्रिया में सबसे अहम अपडेट रेलवे से जुड़ा सामने आया है। रेलवे बोर्ड ने 2 जुलाई 2026 को नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन (NFIR) और ऑल इंडिया रेलवेमेन फेडरेशन (AIRF) को पत्र भेजकर बताया कि आयोग भारतीय रेलवे के कामकाज को जमीनी स्तर पर देखना चाहता है। इसके लिए मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) और सेंट्रल रेलवे क्षेत्र का प्रस्ताव रखा गया है, हालांकि अंतिम स्थान पर अभी फैसला नहीं हुआ है।
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आठवें वेतन आयोग का फोकस सिर्फ आंकड़ों पर नहीं बल्कि कर्मचारियों की असली कार्य परिस्थितियों पर है। आयोग यह समझना चाहता है कि अलग-अलग विभागों में कर्मचारी किन जोखिमों, दबावों और जिम्मेदारियों के बीच काम करते हैं। रेलवे जैसे बड़े और जटिल सिस्टम में यह समझना और भी जरूरी हो जाता है, क्योंकि यहां लाखों कर्मचारी दिन-रात सुरक्षा और संचालन से जुड़े कार्यों में लगे रहते हैं।
सूत्रों के अनुसार आयोग रेलवे के कई महत्वपूर्ण कार्यों को करीब से देख सकता है, जिनमें शामिल हैं-
ट्रैक मेंटेनेंस, कीमैन और पेट्रोलमैन का काम
सिग्नल एंड टेलीकॉम (S&T) और इलेक्ट्रिकल विभाग की जिम्मेदारियां
पॉइंट्समैन और स्टेशन संचालन
ट्रेन मूवमेंट, शंटिंग और भीड़ प्रबंधन
रेलवे कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली
ब्रिज और ट्रैक मेंटेनेंस
हाई-स्पीड ट्रेनों का संचालन और सुरक्षा व्यवस्था
वर्कशॉप में मेंटेनेंस और इंजीनियरिंग गतिविधियां
इसके अलावा प्रयागराज महाकुंभ जैसे बड़े आयोजनों के दौरान भीड़ और ट्रेन प्रबंधन की प्रस्तुति भी आयोग के सामने रखी जा सकती है।
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इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने भी आयोग से अपील की है कि रेलवे के तकनीकी विभागों को भी निरीक्षण में शामिल किया जाए। संगठन का कहना है कि इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और प्रोडक्शन यूनिट्स में काम करने वाले कर्मचारी अत्यधिक जोखिम और तकनीकी दबाव में काम करते हैं। उनका मानना है कि अगर इन सभी विभागों का गहराई से अध्ययन किया जाता है, तो वेतन संशोधन और अधिक संतुलित और वास्तविक हो सकेगा।
Location : New Delhi
Published : 6 July 2026, 5:22 PM IST