RSS Chief बनने की असली शर्त क्या? Mohan Bhagwat का बड़ा खुलासा, कहा- ब्राह्मण-क्षत्रिय या जाति नहीं, यह बात जरूरी

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में आएसएस प्रमुख बनने की असली शर्त को लेकर बड़ा खुलासा किया। पढ़ें क्या कहा आरएसएस चीफ ने

Post Published By: सौम्या सिंह
Updated : 8 February 2026, 1:21 PM IST

Mumbai: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम में संघ प्रमुख डॉ मोहन भागवत ने एक बड़ा खुलासा किया। आरएसएस प्रमुख कौन बन सकता है और इसकी क्या शर्तें हैं, इस बात को लेकर उन्होंने बड़ा बयान दिया। कार्यक्रम में उन्होंने आरएसएस चीफ के पद की पात्रता से जुड़े सवालों का साफ-साफ जवाब दिया।

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ का प्रमुख यानि सरसंघचालक बनने की असली शर्त कोई जाति नहीं बल्कि धर्म है। उन्होंने कहा कि संघ प्रमुख के लिये ब्राह्मण, क्षत्रिय या अन्य जाति का होना जरूरी नहीं है, केवल एक ही शर्त है और वो शर्त है कि संघ प्रमुख केवल हिंदू होना चाहिए।

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उन्होंने साफ किया कि किसी जाति से नहीं बल्कि हिंदू होने से ही इस पद की पात्रता तय होती है। भागवत ने कहा कि जाति के आधार पर पद का चयन नहीं किया जाता, संघ प्रमुख बनने के लिये केवल हिन्दू होने की शर्त जरूरी है।

भागवत ने आगे बताया कि आरएसएस में पद का चयन संगठन और उसके मूल उद्देश्यों के प्रति प्रतिबद्धता के आधार पर किया जाता है, न कि किसी जातिगत पहचान के आधार पर।

जाति नहीं, धर्म है मूल शर्त

डॉ मोहन भागवत ने जोर देकर कहा कि आरएसएस प्रमुख बनने में जाति कभी भी निर्णायक नहीं होती। उन्होंने कहा, "संघ प्रमुख बनने के लिए ब्राह्मण, क्षत्रिय या किसी अन्य जाति से होना आवश्यक नहीं है। केवल हिंदू होना ही इस पद की पात्रता तय करता है।"

इस बयान से यह स्पष्ट हुआ कि संघ में नेतृत्व का चयन धर्म और संगठन के प्रति निष्ठा पर आधारित होता है, न कि सामाजिक या जातिगत पहचान पर।

शताब्दी वर्ष कार्यक्रम में संदेश

शताब्दी वर्ष समारोह में मोहन भागवत ने यह संदेश भी दिया कि संघ के सभी स्वयंसेवकों के लिए धर्म और संगठन के प्रति निष्ठा ही सबसे महत्वपूर्ण गुण हैं। उन्होंने कहा कि संघ में पदाधिकारी और प्रमुख का चयन योग्यता, अनुभव और संगठन के प्रति समर्पण को ध्यान में रखकर किया जाता है।

इस मौके पर संघ प्रमुख ने यह भी स्पष्ट किया कि संगठन के इतिहास में किसी भी सरसंघचालक का चयन जाति के आधार पर नहीं किया गया। यह परंपरा आज भी जारी है।

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संघ और नेतृत्व में योग्यता का महत्व

मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि संघ में नेतृत्व केवल धर्म और योग्यता के आधार पर ही तय होता है। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि संगठन में आने के लिए किसी जाति विशेष से होना जरूरी नहीं है, बल्कि सेवा, निष्ठा और हिंदुत्व के मूल सिद्धांतों का पालन सबसे बड़ा मूल्य है।

उन्होंने यह भी कहा कि संघ का उद्देश्य समाज में समानता और समर्पण के सिद्धांतों को बढ़ावा देना है, इसलिए किसी जाति के आधार पर किसी पद का चयन संगठन की नीति के अनुरूप नहीं है।

Location : 
  • Mumbai

Published : 
  • 8 February 2026, 1:21 PM IST