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धनतेरस का महत्व
New Delhi: धनतेरस दीपावली के पांच दिवसीय पर्व की शुरुआत का दिन माना जाता है। यह हर साल कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन धन और स्वास्थ्य दोनों की देवी-देवताओं की पूजा की जाती है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे। वे अमृत से भरा कलश लेकर आए थे। इसलिए इस दिन धातु के बर्तन या सोना खरीदना अमृत और आरोग्य का प्रतीक माना गया। यही वजह है कि लोग इस दिन नई चीजें खरीदकर घर में शुभता का आगमन मानते हैं।
धनतेरस पर बर्तन खरीदना शुभ क्यों माना जाता है।
पुराने समय में लोग त्योहारों से पहले अपने घर की सफाई, मरम्मत और नवीनीकरण करते थे। धनतेरस के दिन खरीदे गए बर्तन और आभूषण न केवल परंपरा का हिस्सा थे, बल्कि नए आरंभ और समृद्धि के प्रतीक भी थे। माना जाता है कि इस दिन खरीदी गई चीजें पूरे वर्ष शुभ फल देती हैं।
Dhanteras 2025: इस साल कब है धनतेरस? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और सोना-चांदी खरीदने का समय
त्रयोदशी तिथि को “धनत्रयोदशी” कहा जाता है। यह दिन धन, स्वास्थ्य और सौभाग्य का संकेत देता है। सोना खरीदना लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति का प्रतीक है, जबकि चांदी मानसिक शांति लाने वाली मानी जाती है। वहीं बर्तन घर की समृद्धि और भोजन की स्थिरता का प्रतीक हैं।
समय के साथ धनतेरस की खरीदारी का तरीका बदला है। अब लोग डिजिटल गोल्ड, ऑनलाइन ज्वैलरी, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और वाहन खरीदना भी शुभ मानते हैं। भले ही रूप बदला हो, पर इसके पीछे की भावना आज भी वही है समृद्धि और सकारात्मक शुरुआत।
Dhanteras 2025: क्यों मनाया जाता है धनतेरस? जानिए इसका इतिहास और महत्व
धनतेरस पर खरीदी गई वस्तु केवल धन-संपत्ति का प्रतीक नहीं होती, बल्कि यह एक सकारात्मक ऊर्जा और नई शुरुआत का संकेत भी होती है। यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि असली “धन” केवल पैसा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, खुशहाली और परिवार की एकता भी है।
Location : New Delhi
Published : 12 October 2025, 3:39 PM IST
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