
पुरुषों में भी खोखली हो रही हैं हड्डियां (Img- Pinterest)
New Delhi: अक्सर ऑस्टियोपोरोसिस को महिलाओं की बीमारी के रूप में देखा जाता है। यही कारण है कि अधिकांश पुरुष हड्डियों की कमजोरी के खतरों को गंभीरता से नहीं लेते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि कमजोर हड्डियों की यह समस्या केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है।
बढ़ती उम्र के साथ पुरुषों में भी हड्डियों का बोन डेंसिटी तेजी से कम होने लगता है, जिससे फ्रैक्चर होने का जोखिम काफी हद तक बढ़ जाता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई बार लोगों को इस बीमारी का पता तब तक नहीं चलता, जब तक कि वे किसी गंभीर चोट या हड्डी टूटने का शिकार नहीं हो जाते।
पुरुषों में ऑस्टियोपोरोसिस के मामलों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसका मुख्य कारण यह है कि पुरुषों को यह अहसास ही नहीं होता कि वे भी इस बीमारी के दायरे में आ सकते हैं।
ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी चिकित्सीय स्थिति है जिसमें हड्डियां धीरे-धीरे अंदर से खोखली, कमजोर और भुरभुरी होने लगती हैं। सामान्य तौर पर मानव शरीर पुरानी हड्डियों को नष्ट कर नई हड्डियों का निर्माण लगातार करता रहता है। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ शरीर का यह प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने लगता है और हड्डियों के बनने की तुलना में उनका नुकसान अधिक तेजी से होने लगता है।
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चिकित्सकीय विशेषज्ञों के मुताबिक, टेस्टोस्टेरोन हार्मोन पुरुषों के शरीर में केवल मांसपेशियों के विकास, शारीरिक ऊर्जा और यौन स्वास्थ्य के लिए ही आवश्यक नहीं है, बल्कि हड्डियों की मजबूती बनाए रखने में भी इसकी केंद्रीय भूमिका होती है। डॉ. विवेक महाजन बताते हैं कि यह हार्मोन जीवनभर पुरुषों में हड्डियों के निर्माण और उनके सही रखरखाव में मदद करता है।
जैसे-जैसे पुरुषों की उम्र बढ़ती है, उनके शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर प्राकृतिक रूप से कम होने लगता है। इस गिरावट का सीधा और नकारात्मक असर हड्डियों के स्वास्थ्य पर पड़ता है, जिससे शरीर नई हड्डियां बनाने की गति धीमी कर देता है और पुरानी हड्डियां तेजी से नष्ट होने लगती हैं।
कम टेस्टोस्टेरोन का दुष्प्रभाव केवल हड्डियों के कमजोर होने तक ही सीमित नहीं रहता है। इस हार्मोन की कमी के कारण पुरुषों में मांसपेशियों की ताकत और उनका द्रव्यमान (मसल मास) भी घटने लगता है। मांसपेशियों की इस कमजोरी की वजह से शरीर का संतुलन बिगड़ने लगता है और बुजुर्ग पुरुषों में अचानक गिरने का खतरा बढ़ जाता है।
एक तरफ कमजोर हड्डियां और दूसरी तरफ गिरने की बढ़ती संभावना, ये दोनों परिस्थितियां मिलकर शरीर में फ्रैक्चर के जोखिम को कई गुना बढ़ा देती हैं। यही वजह है कि बढ़ती उम्र के पुरुषों में कूल्हे (हिप), रीढ़ की हड्डी (स्पाइन) और कलाई में फ्रैक्चर के मामले सबसे ज्यादा देखने को मिलते हैं।
ऑस्टियोपोरोसिस की सबसे बड़ी चुनौती और खतरा यह है कि इसके शुरुआती चरण में कोई भी स्पष्ट या दर्दनाक लक्षण दिखाई नहीं देते। इसी छिपे हुए स्वभाव के कारण इसे 'साइलेंट डिजीज' या साइलेंट किलर भी कहा जाता है।
इसके बावजूद, कुछ ऐसे संकेत हैं जिन्हें पुरुषों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, जैसे- लगातार पीठ में दर्द रहना, उम्र के साथ धीरे-धीरे लंबाई का कम होना, शरीर का आगे की ओर झुक जाना (झुकी हुई मुद्रा), मामूली सी चोट या झटके में भी हड्डी का टूट जाना और लगातार शारीरिक कमजोरी महसूस होना।
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राहत की बात यह है कि यदि समय रहते इस बीमारी की पहचान कर ली जाए, तो ऑस्टियोपोरोसिस को काफी हद तक बढ़ने से रोका और नियंत्रित किया जा सकता है। अपनी हड्डियों को दीर्घायु और मजबूत बनाए रखने के लिए पुरुषों को अपने दैनिक आहार में कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए।
इसके साथ ही, रोजाना नियमित रूप से वॉक , हल्के वजन के साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या रेजिस्टेंस एक्सरसाइज करना बेहद फायदेमंद साबित होता है। हड्डियों को सुरक्षित रखने के लिए धूम्रपान और अत्यधिक शराब के सेवन से पूरी तरह दूरी बनानी चाहिए और शरीर का वजन संतुलित रखना चाहिए।
Location : New Delhi
Published : 28 June 2026, 4:03 PM IST