
आखिर गोल घेरे में ही क्यों होता है गरबा? (Source: Pinterest)
New Delhi: गरबा गुजरात का पारंपरिक लोकनृत्य है, जो अब देश के कई हिस्सों में नवरात्र के दौरान बड़े उत्साह से किया जाता है। गरबा शब्द को संस्कृत के ‘गर्भ’ शब्द से जुड़ा माना जाता है। पारंपरिक गरबा में नृत्य के बीच मिट्टी का एक घड़ा रखा जाता है। इस घड़े में छोटे-छोटे छेद होते हैं और इसके अंदर दीपक जलाया जाता है।
इस घड़े को कई जगह ‘गरबो’ कहा जाता है। जलते दीपक के चारों ओर लोग गोल घेरे में घूमते हुए ताल और कदम मिलाकर नृत्य करते हैं। मान्यता के अनुसार, घड़े के भीतर जलता दीपक जीवन और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। वहीं, उसके चारों ओर किया जाने वाला नृत्य शक्ति की उपासना से जुड़ा है।
गरबा के गोल घेरे को इसकी सबसे खास पहचान माना जाता है। धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं में इस घेरे को जीवन के चक्र और निरंतरता से जोड़कर देखा जाता है। बीच में रखा दीपक ऊर्जा और जीवन का प्रतीक माना जाता है, जबकि उसके चारों ओर घूमना प्रकृति और शक्ति के प्रति आस्था का भाव दर्शाता है।
नवरात्र में गरबा विशेष रूप से मां अंबा और शक्ति की आराधना से जुड़ा माना जाता है। यही वजह है कि गरबा सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि गुजरात की लोक संस्कृति और धार्मिक परंपरा का हिस्सा भी है।
गरबा आमतौर पर समूह में किया जाता है। इसमें लोग एक साथ गोल घेरे में खड़े होकर तालियां बजाते हैं और कदम मिलाते हुए आगे बढ़ते हैं। पैरों की ताल, हाथों की ताली और शरीर की घूमने वाली गति इसका खास हिस्सा है।
गरबा की शुरुआत अक्सर धीमी गति से होती है और जैसे-जैसे नृत्य आगे बढ़ता है, इसकी रफ्तार भी बढ़ती जाती है। कुछ रूपों में डांडिया का इस्तेमाल भी किया जाता है, जिसमें लकड़ी की डंडियों को आपस में टकराकर ताल बनाई जाती है।
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गरबा में पहनावा भी इसकी संस्कृति को खास पहचान देता है। महिलाएं आमतौर पर रंग-बिरंगी चनिया-चोली पहनती हैं। इन पर मिरर वर्क, कौड़ी, गोटा-पट्टी और कढ़ाई की सजावट होती है। साथ में ओढ़नी और चांदी या ऑक्सीडाइज्ड ज्वेलरी पहनी जाती है।
पुरुष पारंपरिक रूप से केडियूं और धोती पहनते हैं। केडियूं एक घेरदार कुर्ते जैसा परिधान होता है, जिस पर कढ़ाई और शीशे का काम किया जाता है। इसके साथ गुजराती पगड़ी और पारंपरिक आभूषण भी पहने जाते हैं।
Location : Gujarat
Published : 25 September 2026, 11:54 AM IST
Topics : Folk dance Garba Gujarat Indian culture Navratri