देवघर में पशु अस्पताल बेहाल: दवाएं उपलब्ध नहीं, बिगड़ रही पशुओं की सेहत जाने क्या है पशुपालकों का हाल

झारखंड के देवघर जिले में पशु अस्पतालों में दवाओं की भारी कमी सामने आई है। सरकारी अस्पतालों में इलाज अधूरा रह रहा है, जिससे पशुपालकों को मजबूरी में महंगी प्राइवेट दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। गर्मी बढ़ने के साथ पशुओं में बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।

Post Published By: सौम्या सिंह
Updated : 21 April 2026, 2:32 PM IST

Deoghar: झारखंड के देवघर में इन दिनों एक खामोश संकट तेजी से गहराता जा रहा है। पशु अस्पतालों में दवाओं की कमी ने हालात ऐसे बना दिए हैं कि इलाज शुरू तो होता है, लेकिन पूरा नहीं हो पाता। गर्मी के बढ़ते प्रकोप के बीच पशुओं की सेहत बिगड़ रही है और दूसरी ओर पशुपालक महंगी प्राइवेट दवाओं के बोझ तले दबते जा रहे हैं।

अस्पतालों में दवाओं का टोटा

देवघर जिले के जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड स्तर तक के पशु चिकित्सालयों की हालत चिंताजनक हो गई है। मधुपुर, सारठ और सोहरायठाढ़ी जैसे इलाकों में पशु अस्पतालों में जरूरी दवाओं का स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है। अस्पतालों में जांच की सुविधा तो उपलब्ध है, लेकिन दवाओं के अभाव में इलाज अधूरा रह जाता है। बुखार, संक्रमण, पेट और त्वचा से जुड़ी सामान्य बीमारियों के लिए जरूरी दवाएं भी कई जगह नहीं मिल पा रही हैं, जिससे पशुपालकों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।

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प्राइवेट दुकानों का सहारा

सरकारी अस्पतालों में दवा नहीं मिलने के कारण पशुपालकों को मजबूरी में प्राइवेट मेडिकल स्टोर्स का रुख करना पड़ रहा है। यहां दवाएं ऊंचे दामों पर मिलती हैं, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में जहां पशुपालन लोगों की आय का मुख्य स्रोत है, वहां यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। सस्ती और सुलभ इलाज की उम्मीद रखने वाले पशुपालक अब महंगी दवाओं के कारण आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

गर्मी ने बढ़ाई परेशानी

भीषण गर्मी के कारण स्थिति और ज्यादा गंभीर हो गई है। बढ़ते तापमान की वजह से पशुओं में हीट स्ट्रेस, डिहाइड्रेशन और संक्रमण जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में समय पर इलाज और दवाओं की उपलब्धता बेहद जरूरी होती है, लेकिन अस्पतालों में दवाओं की कमी के कारण यह जरूरत पूरी नहीं हो पा रही। इसका सीधा असर पशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है और बीमारी बढ़ने का खतरा बना हुआ है।

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व्यवस्था पर सवाल

प्रशासनिक स्तर पर हर साल पशु अस्पतालों के लिए दवाओं की खरीद के लिए बजट तय किया जाता है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर दवाओं की उपलब्धता संतोषजनक नहीं है। इससे साफ संकेत मिलता है कि दवा आपूर्ति और वितरण व्यवस्था में कहीं न कहीं बड़ी कमी है। यही कारण है कि यह समस्या सिर्फ एक-दो अस्पतालों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे जिले के कई प्रखंडों में फैल चुकी है।

Location :  Deoghar

Published :  21 April 2026, 2:32 PM IST