AI से नौकरियां जाएंगी या बनेंगी? PM मोदी बोले – डर नहीं, तैयारी है समाधान

AI Impact Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी नौकरियों की चिंता, स्किलिंग, जोखिम और अवसरों पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि तकनीक मानवता की सेवा के लिए है, उसे प्रतिस्थापित करने के लिए नहीं। सरकार री-स्किलिंग, इंडिया AI मिशन और मानव-केंद्रित तकनीक पर फोकस कर रही है।

Post Published By: Bobby Raj
Updated : 18 February 2026, 6:28 AM IST

New Delhi: राजधानी में आयोजित AI Impact Summit 2026 के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर युवाओं में बढ़ती नौकरी की चिंता पर खुलकर बात की। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि "भय का सबसे अच्छा इलाज तैयारी है" और सरकार भविष्य की AI-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए बड़े पैमाने पर स्किलिंग और री-स्किलिंग में निवेश कर रही है।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि AI को भविष्य की समस्या नहीं बल्कि वर्तमान की आवश्यकता के रूप में देखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि इतिहास गवाह है, तकनीकी बदलाव नौकरियां खत्म नहीं करते, बल्कि काम का स्वरूप बदलते हैं और नए अवसर पैदा करते हैं। डॉक्टर, शिक्षक और वकील जैसे पेशों में AI की मदद से सेवाएं ज्यादा लोगों तक पहुंच सकेंगी, जिससे रोजगार के नए मॉडल विकसित होंगे।

उन्होंने डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को भारत की अर्थव्यवस्था में टेक-आधारित नौकरियों के विस्तार का प्रमुख माध्यम बताया और कहा कि युवाओं को नई स्किल्स के साथ तैयार करना ही सबसे बड़ा समाधान है।

मानव-केंद्रित AI पर भारत का फोकस

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि AI सभ्यता के एक अहम मोड़ पर खड़ा है और इसका लक्ष्य केवल इनोवेशन नहीं बल्कि सार्थक परिणाम होना चाहिए। उन्होंने तकनीक को "सभी का कल्याण और सभी की खुशी" से जोड़ा और कहा कि AI का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए, न कि केवल शुरुआती उपयोगकर्ताओं तक सीमित रहना चाहिए।

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उन्होंने बताया कि भारत AI का उपयोग असमानता कम करने के लिए करना चाहता है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि डेयरी सेक्टर में AI के जरिए लाखों ग्रामीण महिलाओं तक पहुंच बनाई जा रही है, जिससे स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक अवसर गांव-गांव तक पहुंच सकते हैं।

मोदी ने विकसित भारत 2047 के विजन में AI को प्रमुख भूमिका वाला इंजन बताया और कहा कि यह हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर, शिक्षा और गवर्नेंस में बदलाव लाएगा। उनके अनुसार भारत न केवल AI सेवाओं में बल्कि AI उत्पाद, प्लेटफॉर्म और समाधान विकसित करने में भी अग्रणी बनने की दिशा में काम कर रहा है।

जोखिम, बायस और डीपफेक

प्रधानमंत्री ने AI के संभावित खतरों को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि AI सिस्टम में लिंग, भाषा और सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से जुड़े बायस आ सकते हैं, जिन्हें दूर करने के लिए वैश्विक सहयोग जरूरी है। उन्होंने डीपफेक, अपराध और आतंकवादी गतिविधियों में AI के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए मानव निगरानी, पारदर्शिता और सुरक्षा-आधारित डिजाइन को अनिवार्य सिद्धांत बताया। मोदी ने कहा कि अंतिम निर्णय लेने की जिम्मेदारी हमेशा इंसानों के पास ही रहनी चाहिए।

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सरकार के इंडिया AI मिशन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत मजबूत इंजीनियरिंग टैलेंट के बल पर भरोसेमंद और नैतिक AI विकसित करना चाहता है। उनके मुताबिक AI का लक्ष्य मानव क्षमता को बढ़ाना है, उसे प्रतिस्थापित करना नहीं।

AI Impact Summit के जरिए भारत न केवल तकनीकी चर्चा का मंच बन रहा है, बल्कि मानव-केंद्रित और समावेशी AI के लिए वैश्विक सहमति बनाने की कोशिश भी कर रहा है।

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  • 18 February 2026, 6:28 AM IST