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अमेरिकी नौसेना का सबसे शक्तिशाली USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप दक्षिण चीन सागर से मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है। ईरान-अमेरिका तनाव के बीच यह कदम वैश्विक सुरक्षा हालात और तेल कीमतों पर असर डाल सकता है।
USS अब्राहम लिंकन (Img source: Google)
Tehran: अमेरिकी नौसेना का सबसे शक्तिशाली युद्ध समूह USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप अब तेजी से दक्षिण चीन सागर से मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है। पेंटागन ने यह फैसला ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए लिया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सिर्फ सैन्य ताकत दिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि रणनीतिक दबाव बनाने की एक बड़ी कोशिश है।
USS अब्राहम लिंकन एक निमित्ज क्लास न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर है, जो दुनिया के सबसे बड़े और आधुनिक युद्धपोतों में गिना जाता है। यह कैरियर स्ट्राइक ग्रुप 3 का प्रमुख जहाज है, जिसका आधिकारिक नाम USS अब्राहम लिंकन (CVN-72) है। न्यूक्लियर पावर की वजह से यह बिना ईंधन भरे महीनों तक समुद्र में तैनात रह सकता है।
इस विशाल युद्धपोत का वजन 1 लाख टन से ज्यादा है और इस पर करीब 5,000 से 6,000 नौसैनिक और सैनिक तैनात रहते हैं। पूरे स्ट्राइक ग्रुप में कुल 7,000 से 8,000 सैनिक और मरीन्स शामिल हैं।
USS अब्राहम लिंकन के साथ 3 से 4 आर्लिघ बर्क क्लास गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर तैनात हैं। इनमें USS माइकल मर्फी, USS स्प्रूएंस और USS फ्रैंक ई. पीटर्सन जूनियर जैसे आधुनिक युद्धपोत शामिल बताए जाते हैं। इसके अलावा वर्जीनिया या लॉस एंजेलिस क्लास की 1 से 2 न्यूक्लियर अटैक सबमरीन भी इस बेड़े का हिस्सा हैं। ईंधन, गोला-बारूद और रसद सप्लाई के लिए सपोर्टिंग शिप्स भी साथ चल रही हैं।
USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप की सबसे बड़ी ताकत इसकी एयर पावर है। कैरियर एयर विंग 9 में 65 से 70 अत्याधुनिक विमान शामिल हैं। यह ग्रुप दिन-रात 150 से ज्यादा सॉर्टी उड़ानें भरने में सक्षम है। इसमें F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट, F-35C लाइटनिंग II स्टील्थ फाइटर, E-2D हॉकआई AWACS और EA-18G ग्रोलर जैसे एडवांस एयरक्राफ्ट शामिल हैं। MH-60R/S सीहॉक हेलीकॉप्टर एंटी-सबमरीन और रेस्क्यू ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाते हैं।
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इस युद्ध समूह में सैकड़ों टोमाहॉक क्रूज मिसाइलें तैनात हैं, जो 1,000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी से सटीक हमला कर सकती हैं। इसके अलावा एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलें, ESSM, सी स्पैरो, RAM, Phalanx CIWS और SM-6 जैसे आधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी मौजूद हैं। यह ग्रुप हवाई बढ़त हासिल करने और होर्मुज स्ट्रेट जैसे रणनीतिक इलाकों पर नियंत्रण रखने में सक्षम है।
ईरान और अमेरिका के बीच हाल के महीनों में तनाव काफी बढ़ा है। अमेरिका अपने हितों की सुरक्षा, इजरायल जैसे सहयोगी देशों को समर्थन देने और ईरान पर दबाव बनाने के लिए इस ग्रुप को मिडिल ईस्ट भेज रहा है। यह बेड़ा पहले दक्षिण चीन सागर में रूटीन ऑपरेशन पर था, लेकिन अब इसे तुरंत पश्चिम एशिया की ओर भेजा गया है।
ईरान क्षेत्र में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है, जिसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ सकता है। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में अस्थिरता भारत के व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी चुनौती बन सकती है। भारत सरकार पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
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