भारतीय कंपनियों पर अमेरिकी नागरिकों और फर्मों का डेटा चुराने का गंभीर आरोप, सीनेटरों ने ब्लैकलिस्ट करने की मांग की

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Updated : 10 September 2026, 9:44 AM IST
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Washington: अमेरिका में भारत की तीन निजी कंपनियों पर बड़े पैमाने पर डेटा चोरी और साइबर जासूसी करने का सनसनीखेज आरोप लगा है। अमेरिकी सीनेटरों के एक द्विदलीय समूह ने ट्रंप प्रशासन के वाणिज्य विभाग को एक औपचारिक पत्र लिखकर इन कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। आरोप है कि इन भारतीय फर्मों ने अमेरिका के नागरिकों, प्रमुख व्यावसायिक घरानों और वकीलों के डिजिटल नेटवर्क को हैक कर संवेदनशील डेटा चुराया है।

कार्रवाई के दायरे में आईं तीन प्रमुख कंपनियां

डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर रॉन वाइडेन और शेल्डन व्हाइटहाउस के साथ-साथ रिपब्लिकन सीनेटर पैट हैरिगन ने संयुक्त रूप से कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लटनिक को यह पत्र लिखा है। इस पत्र में विशेष रूप से तीन भारतीय कंपनियों- सनकिस्ड ऑर्गेनिक प्राइवेट लिमिटेड, बेलट्रॉक्स लिमिटेड और साइबररूट लिमिटेड को निशाना बनाया गया है। सीनेटरों ने मांग की है कि इन तीनों फर्मों को तुरंत 'एंटिटी लिस्ट' (ब्लैकलिस्ट) में डाला जाए, ताकि वे अमेरिकी सॉफ्टवेयर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल न कर सकें।

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15 वर्षों से सक्रिय हैं साइबर-मर्सिनरी ग्रुप

सीनेटरों द्वारा भेजे गए पत्र के मुताबिक, भारत में स्थित ये साइबर-मर्सिनरी (किराये के साइबर हैकर) समूह पिछले 15 वर्षों से अधिक समय से अमेरिकी नागरिकों और व्यवसायों के खिलाफ सुनियोजित जासूसी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। रॉयटर्स और द सिटिज़न लैब की ओर से पहले की गई जांचों का हवाला देते हुए बताया गया है कि इन कंपनियों ने कई बड़े और व्यापक हैकिंग अभियान चलाए हैं। इसके तहत प्राइवेट इक्विटी फर्मों, फार्मास्युटिकल कंपनियों और अमेरिकी लॉ फर्मों से जुड़े 1,000 से अधिक वकीलों को खासतौर पर टारगेट किया गया, ताकि चल रहे कानूनी मुकदमों के नतीजों को प्रभावित किया जा सके।

कतर सरकार के इशारे पर जासूसी के संकेत

जांच रिपोर्ट और सीनेटरों के दावों के अनुसार, इस बात के पुख्ता सबूत मिले हैं कि ये साइबर समूह खाड़ी देश कतर सरकार के निर्देशों पर काम कर रहे थे। इन जासूसी अभियानों के दायरे में केवल कॉरपोरेट जगत ही नहीं, बल्कि कतर की विश्व कप (वर्ल्ड कप) बोली का विरोध करने वाले लोग और अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की परमानेंट सेलेक्ट कमिटी ऑन इंटेलिजेंस के एक पूर्व रिपब्लिकन चेयरमैन का परिवार भी शामिल था।

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कानूनी दांव-पेच और मुकदमों के जरिए सेंसरशिप का प्रयास

सीनेटरों ने यह भी आरोप लगाया कि इन कंपनियों ने अपनी अवैध गतिविधियों को छिपाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी पैंतरों (ग्लोबल लॉफेयर) का सहारा लिया। उन्होंने अपनी आलोचनाओं को दबाने और मीडिया रिपोर्टिंग को रोकने के लिए गूगल, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और द न्यू यॉर्कर जैसी दिग्गज अमेरिकी टेक्नोलॉजी और मीडिया कंपनियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए। सीनेटरों का मानना है कि विदेशी अदालतों के इस दुरुपयोग का उद्देश्य अमेरिकी जनता को इन विदेशी साइबर खतरों के बारे में अंधेरे में रखना और उनके संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करना है। अब अमेरिकी प्रशासन पर इन फर्मों के खिलाफ व्यापारिक प्रतिबंध लगाने का भारी दबाव बढ़ गया है।

Location :  Washington

Published :  10 September 2026, 9:44 AM IST

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