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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
New Delhi: अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी जीत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। डेमोक्रेट्स ने सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (प्रतिनिधि सभा), दोनों में बहुमत हासिल कर लिया है। इसके साथ ही अमेरिकी कांग्रेस में सत्ता का समीकरण बदल गया है। हालांकि, चुनावी नतीजों के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने राजनीतिक एजेंडे को लेकर भरोसा जताया है। उनका कहना है कि अगर डेमोक्रेट्स कांग्रेस में उनके फैसलों और नीतियों का विरोध करते हैं, तो वह राष्ट्रपति के वीटो अधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं।
सीबीएस न्यूज को दिए गए एक विशेष फोन इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने अपने वीटो अधिकार का जिक्र करते हुए कहा, "मेरे पास अंतिम शक्ति है- इसे वीटो कहते हैं।" उनसे पूछा गया था कि अगर डेमोक्रेट्स कांग्रेस में नियंत्रण हासिल कर लेते हैं, तो वह अपनी सरकार के एजेंडे को किस तरह आगे बढ़ाएंगे।
इसके जवाब में ट्रंप ने संकेत दिया कि वह डेमोक्रेट्स की ओर से लाए जाने वाले विधायी प्रस्तावों को रोकने के लिए राष्ट्रपति के वीटो अधिकार का इस्तेमाल करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें 'मिस्टर वीटो' कहे जाने से कोई आपत्ति नहीं है। ट्रंप का मानना है कि इस संवैधानिक अधिकार के जरिए वह विपक्ष के कई विधायी प्रयासों को रोक सकते हैं।
अमेरिका में वीटो पावर राष्ट्रपति को संविधान के तहत मिला एक महत्वपूर्ण अधिकार है। इसके जरिए राष्ट्रपति कांग्रेस यानी अमेरिकी संसद से पारित किसी विधेयक को कानून बनने से रोक सकते हैं।
जब अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदन किसी विधेयक को पारित करके राष्ट्रपति के पास भेजते हैं, तो राष्ट्रपति के पास उसे मंजूरी देने या वीटो करने का विकल्प होता है। यदि राष्ट्रपति वीटो लगा देते हैं, तो विधेयक वापस कांग्रेस के पास भेज दिया जाता है।
हालांकि, राष्ट्रपति का वीटो अंतिम फैसला नहीं होता। अमेरिकी कांग्रेस के पास इसे पलटने का भी अधिकार है। इसके लिए प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में दो-तिहाई बहुमत से विधेयक को दोबारा पारित करना जरूरी होता है। अगर दोनों सदन ऐसा करने में सफल रहते हैं, तो राष्ट्रपति के वीटो के बावजूद विधेयक कानून बन सकता है।
मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेट्स की जीत के बाद कांग्रेस में ट्रंप प्रशासन के लिए विधायी फैसले लेना मुश्किल हो सकता है। विपक्षी पार्टी अब सरकार के प्रस्तावों का विरोध करने, प्रशासन की नीतियों की जांच करने और नियुक्तियों पर प्रभाव डालने की स्थिति में होगी।
इसके बावजूद ट्रंप ने सीबीएस न्यूज से बातचीत में रिपब्लिकन पार्टी की चुनावी संभावनाओं को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया था। उन्होंने कहा कि चुनाव के नतीजे और कांग्रेस में बहुमत का समीकरण चाहे जो हो, उन्हें भरोसा है कि वह अगले दो वर्षों में अपना राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ा सकेंगे।
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि लगातार वीटो का इस्तेमाल करने के बाद डेमोक्रेट्स उनके साथ समझौता करने के लिए तैयार हो सकते हैं। उनके मुताबिक, कुछ महीनों तक वीटो का इस्तेमाल करने के बाद विपक्ष को समझौते की जरूरत महसूस हो सकती है।
इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले Trump v. Slaughter का भी उल्लेख किया। यह मामला फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) की सदस्य रेबेका स्लॉटर को उनके पद से हटाने से जुड़ा था।
29 जून 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 6-3 से फैसला सुनाया था। अदालत ने राष्ट्रपति को संघीय एजेंसियों के अधिकारियों को हटाने के मामले में व्यापक अधिकार दिए। ट्रंप ने इस फैसले को अपनी कार्यकारी शक्तियों के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया।
उनका कहना था कि इस फैसले से राष्ट्रपति को संघीय एजेंसियों, बोर्ड और आयोगों पर पहले की तुलना में अधिक नियंत्रण रखने की शक्ति मिली है। ट्रंप के मुताबिक, कांग्रेस में डेमोक्रेट्स का बहुमत होने के बावजूद यह फैसला उन्हें अपनी नीतियों को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है।
इस तरह मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेट्स की जीत के बाद अमेरिकी राजनीति में राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच टकराव की संभावना बढ़ गई है। एक तरफ विपक्ष के पास विधायी प्रक्रिया पर प्रभाव डालने की ताकत होगी, तो दूसरी तरफ ट्रंप वीटो और राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियों के जरिए अपनी सरकार का एजेंडा आगे बढ़ाने की रणनीति पर भरोसा कर रहे हैं।
Location : New Delhi
Published : 4 November 2026, 2:16 PM IST