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प्रतीकात्मक छवि (Source Internet)
New Delhi: भारत की साइबर सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। देश की साइबर सुरक्षा एजेंसी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) को अमेरिकी AI कंपनी एंथ्रोपिक के एडवांस्ड साइबर सुरक्षा AI मॉडल Claude Mythos का एक्सेस मिल गया है। एजेंसी इस मॉडल की मदद से भारतीय डिजिटल सिस्टम में मौजूद कमजोरियों और संभावित साइबर खतरों का पता लगाने की क्षमता का परीक्षण करेगी। इसका उद्देश्य साइबर हमलों से पहले सुरक्षा खामियों की पहचान करना और देश के डिजिटल बुनियादी ढांचे को सुरक्षित बनाने की तैयारी को मजबूत करना है।
Claude Mythos एंथ्रोपिक का एडवांस्ड AI मॉडल है, जिसे साइबर सुरक्षा से जुड़े कार्यों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। यह सॉफ्टवेयर और डिजिटल सिस्टम में मौजूद कमजोरियों की पहचान करने तथा संभावित साइबर खतरों का विश्लेषण करने में सक्षम बताया जाता है।
ET Telecom की रिपोर्ट के मुताबिक, आईटी मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि CERT-In इस मॉडल की क्षमताओं का इस्तेमाल करेगी और यह समझने की कोशिश करेगी कि साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में इसका बेहतर उपयोग कैसे किया जा सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी इस AI मॉडल की मदद से डिजिटल सिस्टम में मौजूद सुरक्षा खामियों का पता लगाने पर काम करेगी। इससे संभावित साइबर हमलों को रोकने और कमजोरियों को समय रहते ठीक करने में मदद मिल सकती है।
CERT-In को Claude Mythos का एक्सेस ऐसे समय में मिला है, जब एजेंसी ने हाल ही में कुछ खतरनाक AI एजेंट्स को लेकर चेतावनी जारी की थी। एजेंसी के मुताबिक, कुछ AI एजेंट्स ने भारत के चुनिंदा संगठनों के सिस्टम में सेंध लगाकर एक्सेस हासिल किया था। हालांकि, इस मामले में संबंधित संगठनों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए थे।
ऐसे में साइबर सुरक्षा के लिए एडवांस्ड AI तकनीक का इस्तेमाल महत्वपूर्ण हो गया है। AI की मदद से जहां डिजिटल सिस्टम की कमजोरियों को तेजी से पहचाना जा सकता है, वहीं गलत इरादे वाले लोग भी इसी तकनीक का इस्तेमाल साइबर हमलों के लिए कर सकते हैं।
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, CERT-In इस AI मॉडल की टेस्टिंग के दौरान विशेष सावधानी बरत रही है। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि एजेंसी जिन चीजों की जांच करना चाहती है, उन्हें धीरे-धीरे सिस्टम में शामिल करेगी। इसलिए यह प्रक्रिया जल्दबाजी में पूरी नहीं की जाएगी।
अधिकारी के मुताबिक, एजेंसी पहले इस मॉडल को समझेगी और इसके साथ प्रयोग करेगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तकनीक का इस्तेमाल सुरक्षा बढ़ाने के लिए हो और इससे किसी तरह का नया खतरा पैदा न हो।
Claude Mythos का एक्सेस सभी कंपनियों और संस्थानों को नहीं दिया गया है। इसे चुनिंदा भरोसेमंद कंपनियों और संस्थानों तक सीमित रखा गया है, ताकि इसकी शक्तिशाली साइबर क्षमताओं का गलत इस्तेमाल न हो सके।
इस तरह के एडवांस्ड AI मॉडल का इस्तेमाल हैकिंग और साइबर हमलों के लिए भी किया जा सकता है। इसलिए इसके एक्सेस को नियंत्रित रखना जरूरी माना जा रहा है। भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी को इसका एक्सेस मिलने से डिजिटल सिस्टम की कमजोरियों की पहचान करने और संभावित खतरों के खिलाफ तैयारी करने में मदद मिल सकती है।
CERT-In केवल Claude Mythos पर निर्भर नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एजेंसी कुछ अन्य AI मॉडल्स का भी इस्तेमाल कर रही है। इससे साइबर सुरक्षा से जुड़े कामों में अलग-अलग AI तकनीकों की क्षमताओं का लाभ उठाया जा सकेगा।
दरअसल, साइबर सुरक्षा में AI का इस्तेमाल दोहरी चुनौती लेकर आया है। एक तरफ यह सुरक्षा खामियों का पता लगाने और उन्हें दूर करने में मदद कर सकता है, तो दूसरी तरफ साइबर अपराधी भी इसका इस्तेमाल अधिक प्रभावी हमलों के लिए कर सकते हैं। ऐसे में CERT-In की रणनीति AI की क्षमताओं का नियंत्रित और सावधानीपूर्वक इस्तेमाल करके देश के डिजिटल सिस्टम को सुरक्षित बनाने की है।
Location : New Delhi
Published : 4 November 2026, 11:12 AM IST
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