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मध्य पूर्व में अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच तीसरे दिन भी संघर्ष जारी। बड़े-बड़े हमले, जवाबी मिसाइलें, लेबनान में हिज़बुल्लाह की भागीदारी और वैश्विक बाजारों में प्रभाव दिखा रहा है। ऐसे में ईरान का बड़ा बयान सामने आया है। यहां जानिये ईरान ने युद्ध को लेकर क्या कहा…
अमेरिका से बातचीत नहीं करेगा ईरान (Img- Internet)
Tehran: अमेरिका- इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के लंबा चलने की आशंकाएं हैं। ईरान इस जंग में अमेरिका और इजरायल को कड़ा जवाब देने के मूड में दिखाई दे रहा है। ईरान ने दो टूक कहा है कि वह अमेरिका से बात नहीं करेगा। ईरान के नए नेतृत्व से बातचीत को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दिए गए संकेतों के बीच ईरान के एक शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि वे वाशिंगटन से बातचीत नहीं करेंगे।
आज मध्य पूर्व में चल रहे टकराव को तीन दिन हो गए हैं, जिसमें संयुक्त रूप से अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के कई सैन्य एवं रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया है। यह युद्ध 28 फ़रवरी को शुरू हुआ था जब अमेरिका-इज़रायल गठबंधन ने बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए, जिनका लक्ष्य ईरान की सैन्य क्षमता और नेतृत्व ढांचा बताया गया।
आक्रमण में अमेरिकी और इज़रायली वायुसेना ने तेहरान सहित कई बड़े शहरों पर बमबारी की है। ईरान ने जवाब में मिसाइलें और ड्रोन तक दागे, जिनमें से कुछ ने अरब देशों, खाड़ी क्षेत्र और इज़राइल को भी निशाना बनाया। संघर्ष में अब तक भारी नुकसान और जान-माल की हानि की खबरें आ रही हैं।
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ईरान के सरकारी और मानवीय संगठनों के मुताबिक़, हवाई हमलों में सैंकड़ों लोग मरे और घायल हुए हैं, जिनमें बड़े आंदोलन और स्कूलों पर हुए हमलों के कारण शिक्षक और छात्र भी शामिल हैं। विरोधी हमलों से इज़राइल में भी नागरिक प्रभावित हुए हैं और सुरक्षा अलर्ट जारी हैं।
ईरानी नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि वह आगे किसी शांति वार्ता में नहीं बैठेगा। ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि अमेरिका की रणनीतियाँ क्षेत्र को अस्थिर कर रही हैं और वह अपने जवाबी हमलों को जारी रखेगा।
इलाके में भारी तबाही (Img- Internet)
यह संघर्ष अब सीमाओं से आगे बढ़कर लेबनान में सक्रिय हिज़बुल्लाह समूह को भी शामिल कर चुका है, जिसने इज़राइल की ओर मिसाइलें दागी हैं। इसके परिणामस्वरूप कई नागरिक इलाकों को खाली कर दिया गया है और हिज़बुल्लाह-इज़राइल मोर्चे पर टकराव बढ़ गया है।
संघर्ष का असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहा। खाड़ी समुदाय, यूरोपीय शक्तियाँ, संयुक्त राष्ट्र और विश्व के कई नेताओं ने दोनों पक्षों से संयम की अपील की है। तेल और सोने जैसी कमोडिटी की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया है, जो वैश्विक बाज़ार अस्थिरता की ओर संकेत है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह संघर्ष कुछ दिनों या हफ्तों से अधिक लंबा चल सकता है। दोनों पक्षों के बीच प्रतिशोधी हमले और जवाबी कार्रवाइयाँ जारी हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता जा रहा है। यह भी माना जा रहा है कि भविष्य में कूटनीतिक प्रयास युद्ध को खत्म करने की कोशिश करेंगे, लेकिन फिलहाल कोई स्पष्ट समाधान नहीं दिख रहा है।