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सुनीता विलियम्स भारतीय मूल की नासा अंतरिक्ष यात्री हैं, जिन्होंने 27 साल के करियर में 3 मिशन, 9 स्पेस वॉक और 608 दिन अंतरिक्ष में बिताकर इतिहास रचा। वे अंतरिक्ष में सबसे ज्यादा समय बिताने वाली महिला हैं और ISS की कमांडर भी रह चुकी हैं।
भारतीय मूल की नासा अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स (Img: Google)
New Delhi: भारतीय मूल की मशहूर अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स का नाम अंतरिक्ष इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। नासा ने 1998 में उनका चयन किया था और इसके बाद उन्होंने 27 वर्षों तक अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया। सुनीता विलियम्स न केवल अंतरिक्ष में सबसे ज्यादा समय बिताने वाली महिला हैं, बल्कि वे मानव अंतरिक्ष उड़ान की सबसे प्रभावशाली नेताओं में भी गिनी जाती हैं।
सुनीता विलियम्स ने पहली बार दिसंबर 2006 में स्पेस शटल डिस्कवरी के जरिए अंतरिक्ष की यात्रा की। यह मिशन एक्सपेडिशन 14/15 का हिस्सा था, जिसने उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर रहते हुए उन्होंने कई वैज्ञानिक प्रयोग किए और अंतरिक्ष में मानव क्षमताओं को नए सिरे से परिभाषित किया।
जुलाई 2012 में उन्होंने अपना दूसरा मिशन शुरू किया और एक्सपेडिशन 32/33 के दौरान ISS की कमांडर बनीं। यह उपलब्धि उन्हें अंतरिक्ष स्टेशन की कमान संभालने वाली चुनिंदा महिलाओं में शामिल करती है। उनका अंतिम मिशन जून 2024 में बोइंग के स्टारलाइनर के जरिए हुआ, जब वे एक्सपेडिशन 71/72 का हिस्सा बनीं। मार्च 2025 में पृथ्वी पर लौटने से पहले उन्होंने एक बार फिर अंतरिक्ष स्टेशन की कमान संभाली।
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अपने करियर में सुनीता विलियम्स ने कुल 3 मिशनों में 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए। यह किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री द्वारा बिताया गया सबसे लंबा समय है और नासा के किसी भी अंतरिक्ष यात्री के लिए दूसरा सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। उन्होंने 9 स्पेस वॉक किए, जिनकी कुल अवधि 62 घंटे 6 मिनट रही। इसके साथ ही वे अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ने वाली पहली व्यक्ति बनीं।
नासा ने 20 जनवरी को घोषणा की कि सुनीता विलियम्स की सेवानिवृत्ति 27 दिसंबर 2025 से प्रभावी हो चुकी है। नासा अधिकारी जेरेड आइज़ैकमान ने उनकी प्रशंसा करते हुए कहा कि सुनीता विलियम्स ने चंद्रमा के आर्टेमिस मिशन और भविष्य के मंगल अभियानों की नींव मजबूत की है।
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सुनिता विलियम्स के मेहनत और आत्मविश्वास को देखकर लगता है कि किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है, कभी ना हार मानने वाला जज्बा और उनके द्वारा किए गए काम आने वाली पीढ़ी को हमेशा प्रोत्साहित करती रहेगी।
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