हिंदी
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
दुशान्बे: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने की अपील करते हुए कहा कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता और इससे निपटने में दोहरे मापदंड नहीं अपनाए जाने चाहिए। ताजिकिस्तान की राजधानी दुशान्बे में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को खत्म करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों को वित्तीय सहायता देने, उनका समर्थन करने या उन्हें सुरक्षित पनाह मुहैया कराने वालों के लिए दुनिया में कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
राजनाथ सिंह ने आतंकवाद को वैश्विक शांति, स्थिरता और विकास के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद केवल निर्दोष लोगों की जान नहीं लेता, बल्कि निवेश, व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं को भी प्रभावित करता है।
रक्षा मंत्री ने आतंकवाद के सामाजिक प्रभावों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समाज में कट्टरपंथ को बढ़ावा देता है और युवाओं को उनके लिए उपलब्ध अवसरों से वंचित करता है। उन्होंने आतंकवाद के वित्तपोषण और उसे सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की जरूरत पर बल दिया।
रक्षा मंत्री ने बिश्केक में हुए SCO शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रखे गए भारत के दृष्टिकोण का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर शंघाई सहयोग संगठन के लिए भारत की सोच के तीन महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।
राजनाथ सिंह के मुताबिक, सुरक्षा निवेश को प्रोत्साहित करती है, जबकि बेहतर कनेक्टिविटी से व्यापार सुगम होता है। सुरक्षा और कनेक्टिविटी मिलकर आर्थिक विकास को गति देने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकती हैं।
उन्होंने मध्य एशियाई देशों के साथ भारत के ऐतिहासिक और मजबूत संबंधों का भी जिक्र किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत इन देशों के साथ अपनी पुरानी दोस्ती और सहयोग को महत्व देता है।
उन्होंने SCO की 25वीं वर्षगांठ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संगठन की अब तक की यात्रा की समीक्षा करने और भविष्य की दिशा तय करने का अवसर है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी संगठन से सुरक्षा, सामूहिक सहयोग और आर्थिक अवसरों के क्षेत्र में ठोस कदम उठाने का आह्वान किया था।
राजनाथ सिंह ने 2026 से 2030 की अवधि के लिए बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम की कार्ययोजना अपनाने के प्रति भारत का समर्थन जताया।
उन्होंने कहा कि SCO के सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग ऐसा होना चाहिए, जिससे सभी सदस्यों को लाभ मिले। इसके लिए व्यापार और निवेश बढ़ाने, मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाएं विकसित करने तथा विकास के लिए तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल पर ध्यान देना जरूरी है।
रक्षा मंत्री ने समावेशी आर्थिक विकास की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि सहयोग का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचना चाहिए।
वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर बात करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि दुनिया इस समय अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। विभिन्न क्षेत्रों में संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार तथा आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित कर रहे हैं।
उन्होंने ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा को महत्वपूर्ण चिंताएं बताते हुए कहा कि नई तकनीकें अर्थव्यवस्थाओं को बदल रही हैं, लेकिन इनके कारण नई असमानताएं भी पैदा हो रही हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि SCO की सफलता इस बात से आंकी जाएगी कि संगठन साझा हितों के मुद्दों पर सहमति बनाने और उन्हें जमीन पर लागू करने में कितना प्रभावी रहता है।
राजनाथ सिंह ने सदस्य देशों के बीच आर्थिक जुड़ाव को अधिक समावेशी बनाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं, व्यापार विस्तार, निवेश और तकनीकी सहयोग को क्षेत्रीय विकास के महत्वपूर्ण आधारों के रूप में रेखांकित किया।
उनके संबोधन का मुख्य संदेश था कि आतंकवाद के खिलाफ साझा कार्रवाई और आर्थिक सहयोग को मजबूत बनाना क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए जरूरी है।
Location : New Delhi
Published : 20 October 2026, 3:38 PM IST
Topics : Dushanbe Tajikistan Rajnath Singh SCO meeting Rajnath Singh terrorism statement SCO Council of Heads of Government
No related posts found.