NASA के जूनो मिशन से बदला बृहस्पति का आकार, नयी रिसर्च ने पुरानी जानकारी को किया गलत साबित

नासा के जूनो मिशन से मिले नए आंकड़ों के अनुसार बृहस्पति ग्रह में पहले के अनुमान से बदलाव पाया गया, वैज्ञानिकों ने 13 फ्लाइबाई के डेटा और रेडियो ऑकल्टेशन तकनीक से इसका नया आकार तय किया है, यह शोध 2 फरवरी 2026 को Nature Astronomy में प्रकाशित हुआ, आइये जानते क्या कहती है नयी रिसर्च

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 9 February 2026, 7:31 PM IST

New Delhi : नासा (NASA) के जूनो (Juno) मिशन से मिले नए आंकड़ों ने सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति (Jupiter) के आकार और संरचना को लेकर वैज्ञानिक समझ को अपडेट कर दिया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, बृहस्पति अब तक माने गए आकार से थोड़ा छोटा और ध्रुवों पर अधिक चपटा है।

आकार में हुआ संशोधन

नासा के मुताबिक, बृहस्पति का भूमध्यरेखीय व्यास पहले की तुलना में करीब 8 किलोमीटर कम पाया गया है, जबकि ध्रुवों पर यह लगभग 24 किलोमीटर ज्यादा चपटा है। पहले इसके आकार का अनुमान 1970 के दशक में पायनियर और वॉयेजर मिशनों के दौरान किए गए मापों पर आधारित था।

कैसे हुआ नया मापन

जूनो मिशन के दौरान वैज्ञानिकों ने 13 फ्लाइबाई के डेटा का विश्लेषण किया। इसमें ‘रेडियो ऑकल्टेशन’ तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिससे बृहस्पति के घने बादलों के भीतर की संरचना को समझा गया। जब जूनो से भेजे गए रेडियो सिग्नल बृहस्पति के वायुमंडल से होकर पृथ्वी तक पहुंचे, तो उनके झुकाव और गति में आए बदलाव से तापमान, दबाव और इलेक्ट्रॉन घनत्व का अनुमान लगाया गया।

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वैज्ञानिकों के लिए क्यों अहम है यह खोज

बृहस्पति का सटीक आकार खगोल विज्ञान में एक मानक की तरह इस्तेमाल किया जाता है, खासकर अन्य तारकीय प्रणालियों में पाए जाने वाले विशाल ग्रहों (एक्सोप्लैनेट्स) के अध्ययन में। इसका नया मापन वैज्ञानिकों को दूर स्थित ग्रहों के डेटा को बेहतर तरीके से समझने में मदद करेगा।

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रिसर्च कहां प्रकाशित हुई

इस अध्ययन के नतीजे 2 फरवरी 2026 को जर्नल Nature Astronomy में प्रकाशित किए गए हैं। जूनो मिशन का संचालन नासा की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी (JPL), कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Caltech) द्वारा किया जा रहा है।

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  • 9 February 2026, 7:31 PM IST