
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स- गूगल)
Islamabad: पाकिस्तान का खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत एक बार फिर सेना के खून-खराबे का गवाह बन गया है। बीती रात लंडी कोटल तहसील के मात्रे दारा गांव में पाकिस्तानी सेना ने एक भयावह एयर स्ट्राइक की, जिसमें अब तक 30 से अधिक निर्दोष नागरिकों की जान जा चुकी है। मृतकों में कई मासूम बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं।
घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत और गुस्से का माहौल है। स्थानीय विधायक इकबाल अफरीदी ने इस बर्बर कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए फेसबुक पर लिखा, "यह दिल दहला देने वाला है कि वादी तिराह अकाखेल में मासूम बच्चों और महिलाओं की बमबारी में शहादत हुई है। यह अत्याचार इंसानियत के खिलाफ सबसे बड़ा जुर्म है, जिसकी जितनी निंदा की जाए उतनी कम है।"
इस घटना ने एक बार फिर पाकिस्तान की दोहरी नीति को उजागर कर दिया है। एक ओर यही पाकिस्तानी सरकार और सेना खैबर पख्तूनख्वाह में जैश-ए-मोहम्मद जैसे वैश्विक आतंकी संगठनों को पुलिस सुरक्षा में रैली और भर्ती अभियान चलाने देती है, वहीं दूसरी ओर निर्दोष नागरिकों के घरों पर बम बरसाती है। पिछले हफ्ते ही खबर सामने आई थी कि पाकिस्तान पुलिस की निगरानी में जैश-ए-मोहम्मद का एक बड़ा मजमा आयोजित किया गया था, जिसमें युवाओं को आतंकी संगठन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया गया।
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JF-17 थंडर, चीन के सहयोग से बना पाकिस्तान का फाइटर जेट है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर सीमाई इलाकों में सुरक्षा मिशनों में किया जाता है। लेकिन हाल ही में सेना ने इसका उपयोग अपने ही नागरिकों के खिलाफ करना शुरू कर दिया है। LS-6 गाइडेड बम हाई प्रिसिशन हथियार हैं, जिन्हें टारगेट पर सटीक हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है। इन बमों को रिहायशी इलाकों पर गिराना, किसी सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि एक युद्ध अपराध के तौर पर देखा जाना चाहिए।
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सबसे चिंताजनक बात यह है कि पाकिस्तान में लगातार हो रहे इन हवाई हमलों और आम नागरिकों की हत्याओं पर न तो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन कोई प्रतिक्रिया दे रहे हैं और न ही संयुक्त राष्ट्र इस विषय पर कोई संज्ञान ले रहा है। यह एक खतरनाक संकेत है कि जब एक परमाणु शक्ति संपन्न देश अपने ही नागरिकों के खिलाफ हवाई हमले करता है और दुनिया चुप रहती है, तो इससे भविष्य में और बड़ी त्रासदियों के लिए दरवाजे खुल सकते हैं।
Location : Islamabad
Published : 22 September 2025, 12:20 PM IST