
प्रतीकात्मक छवि
New Delhi: ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के साथ जारी तनाव और संघर्ष का असर वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखने लगा है। होर्मुज स्ट्रेट के जरिए मध्य पूर्व से होने वाली तेल सप्लाई लगभग ठप पड़ गई है, जिससे भारत के कच्चे तेल आयात पर सीधा असर पड़ा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, सप्लाई बाधित होने के चलते मार्च में भारत का कच्चा तेल आयात फरवरी (युद्ध से पहले) के मुकाबले करीब 13% घट गया। हालांकि, इस संकट के बीच रूस से आयात ने भारत को बड़ी राहत दी, जहां से कुल आयात का लगभग आधा हिस्सा आया।
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दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई जिस होर्मुज स्ट्रेट से गुजरती है, वह 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद से लगभग ठप है। पिछले दो महीनों में बेहद कम तेल टैंकर भारत पहुंच पाए हैं।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में इस मार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहे भारत के झंडे वाले दो जहाजों पर हमला भी किया गया, जिससे समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
मार्च में रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना रहा, जबकि सऊदी अरब ने इराक को पीछे छोड़ते हुए दूसरा स्थान हासिल किया।
मध्य पूर्व से सप्लाई घटने के कारण भारतीय रिफाइनरियों ने वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख किया, जिसके चलते अफ्रीकी देशों से आयात बढ़ा। अंगोला तीसरे स्थान पर पहुंच गया, जबकि संयुक्त अरब अमीरात और इराक इसके बाद रहे।
Location : New Delhi
Published : 21 April 2026, 7:46 PM IST
Topics : India Israel Iran War Oil Supply Russia Starit of Hormuz