New Delhi: भारत–न्यूजीलैंड में FTA डील, व्यापार क्षेत्र में बड़े फायदे की उम्मीद

भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बड़े बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। इस डील से दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में नई दिशा मिलने की संभावना है और आने वाले समय में आर्थिक सहयोग और अवसरों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 27 April 2026, 10:48 AM IST
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New Delhi: भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई मजबूती देते हुए मुक्त व्यापार समझौता (FTA) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 5 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।

समझौता कब और कहां हुआ?

यह ऐतिहासिक समझौता सोमवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में हस्ताक्षरित किया गया। इससे पहले 22 दिसंबर को बातचीत पूरी होने की घोषणा हुई थी और चार महीने बाद इसे अंतिम रूप दिया गया।

कौन रहा शामिल?

इस समझौते पर भारत की ओर से वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले मौजूद रहे। प्रधानमंत्री Narendra Modi और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बीच हुई बातचीत ने इस समझौते को अंतिम रूप देने में अहम भूमिका निभाई।

क्या है समझौते का उद्देश्य?

इस FTA का मुख्य लक्ष्य दोनों देशों के बीच व्यापार को 5 साल में दोगुना करना, व्यापारिक बाधाओं और टैरिफ को कम करना, निर्यात और निवेश को बढ़ावा देना और  आर्थिक साझेदारी को मजबूत बनाना है।

भारत को क्या फायदा होगा?

न्यूजीलैंड में जाने वाले करीब 70% भारतीय उत्पादों पर टैक्स खत्म या कम होगा। भारतीय सामान वहां सस्ता और अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा। न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश करेगा। विनिर्माण, सेवा, इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार क्षेत्रों में तेजी आएगी। ओशिनिया क्षेत्र में भारत के निर्यात को विस्तार मिलेगा

 न्यूजीलैंड को क्या फायदा होगा?

भारत से आने वाले ऊन, कोयला, भेड़ का मांस, एवोकाडो, ब्लूबेरी और शराब पर टैरिफ कम या खत्म होगा। 95% से अधिक वानिकी और लकड़ी उत्पादों को राहत मिलेगी। भारत में न्यूजीलैंड का निर्यात और बाजार पहुंच बढ़ेगी

 किसानों और उद्योगों की सुरक्षा

भारत ने अपने किसानों और घरेलू उद्योग (MSME) की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डेयरी क्षेत्र को इस समझौते से बाहर रखा,दूध, क्रीम और चीज पर कोई रियायत नहीं दी, प्याज, चना, मक्का, चीनी, बादाम, हथियार और कई संवेदनशील उत्पादों को भी बाहर रखा और इससे घरेलू कृषि और उद्योग सुरक्षित रहेंगे।

कृषि और तकनीकी सहयोग के तहत न्यूजीलैंड भारत को कीवी, सेब और शहद उत्पादन में आधुनिक तकनीकी सहायता प्रदान करेगा। इस साझेदारी के माध्यम से उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना की जाएगी, जहां किसानों को उन्नत खेती और उत्पादन तकनीकों का प्रशिक्षण मिलेगा। साथ ही आधुनिक बाग प्रबंधन तकनीक, कटाई के बाद बेहतर प्रबंधन प्रणाली और फसल की गुणवत्ता सुधारने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा खाद्य सुरक्षा मानकों को मजबूत करने और आपूर्ति शृंखला को अधिक प्रभावी बनाने के लिए भी सहयोग किया जाएगा, जिससे भारतीय किसानों की उत्पादकता और आय में वृद्धि हो सके।

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रोजगार और सेवा क्षेत्र में इस समझौते के तहत भारतीय पेशेवरों के लिए बड़े अवसर खुलने जा रहे हैं। इसके अनुसार न्यूजीलैंड हर वर्ष 5,000 भारतीय नागरिकों को तीन साल का अस्थायी वर्क वीजा प्रदान करेगा। इस योजना में आईटी, हेल्थकेयर, इंजीनियरिंग, शिक्षा, योग, आयुष और निर्माण जैसे उच्च मांग वाले क्षेत्र शामिल हैं। इससे न केवल भारतीय प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर मिलेंगे, बल्कि सेवा क्षेत्र में भारत की वैश्विक पकड़ भी और मजबूत होगी।

फार्मा और मेडिकल सेक्टर को फायदा

भारत के फार्मा और मेडिकल उपकरण क्षेत्र को इस समझौते से बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। अब न्यूजीलैंड में भारतीय दवाओं और मेडिकल उपकरणों के निर्यात की प्रक्रिया और आसान होगी, क्योंकि यूएस एफडीए, ईयू और यूके जैसी प्रतिष्ठित वैश्विक नियामक एजेंसियों की रिपोर्ट को स्वीकार किया जाएगा। इससे कंपनियों को बार-बार होने वाली दोहरी जांचों से राहत मिलेगी और मंजूरी प्रक्रिया काफी तेज हो जाएगी। साथ ही, अनुपालन लागत में कमी आने से भारतीय निर्यातकों पर आर्थिक बोझ घटेगा, जिससे फार्मा और मेडिकल उपकरणों के निर्यात को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई गति मिलेगी।

Location :  New Delhi

Published :  27 April 2026, 10:20 AM IST

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