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ट्रंप के निवेश पोर्टफोलियो पर बड़ा खुलासा (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
New Delhi: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump एक बार फिर अपने बिजनेस और निवेश गतिविधियों को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि साल 2026 की पहली तिमाही के दौरान उनके निवेश पोर्टफोलियो से करोड़ों डॉलर के शेयरों की खरीद-फरोख्त की गई। इस खुलासे के बाद अमेरिका में हितों के टकराव यानी ‘कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ को लेकर बहस तेज हो गई है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 1 जनवरी से 31 मार्च 2026 के बीच ट्रंप के पोर्टफोलियो से शेयर बाजार में 3,600 से ज्यादा लेनदेन दर्ज किए गए। इसका मतलब यह है कि अमेरिकी शेयर बाजार जितने दिन खुला, लगभग हर दिन औसतन 50 ऑर्डर किए गए।
रिपोर्ट के अनुसार, यह जानकारी ट्रंप की ताजा ‘फेडरल एथिक्स फाइलिंग’ से सामने आई है। यह ऐसा सरकारी दस्तावेज होता है जिसमें अमेरिका के बड़े नेताओं और अधिकारियों को अपनी संपत्ति, कमाई और निवेश से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करनी होती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि सरकारी फैसलों और निजी निवेश के बीच किसी प्रकार का हितों का टकराव न हो।
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रिपोर्ट में बताया गया है कि इस अवधि के दौरान ट्रंप के पोर्टफोलियो से कुल 100 मिलियन डॉलर के शेयरों का लेन-देन हुआ। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 964 करोड़ रुपये के बराबर है।
इतनी बड़ी रकम के निवेश और ट्रेडिंग गतिविधियों ने राजनीतिक और कारोबारी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। खासतौर पर इसलिए क्योंकि जिन कंपनियों में निवेश किया गया है, उन पर अमेरिकी सरकार की नीतियों का सीधा असर पड़ता है।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के पोर्टफोलियो में कई दिग्गज टेक कंपनियों के शेयर शामिल हैं। इनमें NVIDIA, Apple, Tesla और Boeing जैसी कंपनियां प्रमुख हैं।
बताया गया है कि अकेले एनवीडिया के लगभग 60 लाख डॉलर यानी करीब 58 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे गए। गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन ने पिछले वर्ष एनवीडिया के लेटेस्ट एआई चिप्स को चीन में बेचने की मंजूरी दी थी।
इसके अलावा एनवीडिया के सीईओ Jensen Huang, एप्पल, बोइंग और टेस्ला के शीर्ष अधिकारियों के साथ हाल ही में ट्रंप की चीन यात्रा में भी शामिल रहे थे।
टेक कंपनियों के अलावा ट्रंप के पोर्टफोलियो में रक्षा क्षेत्र की बड़ी कंपनियों के शेयर भी शामिल बताए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध के दौरान जब अमेरिकी मिलिट्री सप्लाई चेन प्रभावित हो रही थी, उसी समय उनके पोर्टफोलियो से हथियार बनाने वाली कंपनियों के शेयर खरीदे गए।
इन कंपनियों में Lockheed Martin, General Dynamics और Northrop Grumman जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं।
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रिपोर्ट सामने आने के बाद अमेरिका में यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या राष्ट्रपति पद पर रहते हुए इस तरह के बड़े निवेश और ट्रेडिंग गतिविधियां हितों के टकराव की स्थिति पैदा कर सकती हैं। खासतौर पर तब, जब सरकारी नीतियों का सीधा असर उन्हीं कंपनियों पर पड़ता हो जिनमें निवेश किया गया हो।
Location : New Delhi
Published : 23 May 2026, 8:39 AM IST