Bareilly News: खुद को एडीएम बताने वाली फर्जी आईएएस विप्रा पर एक और FIR, लेखपाल नौकरी के नाम पर 8.35 लाख की ठगी

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में खुद को आईएएस और एडीएम बताने वाली शातिर ठग विप्रा शर्मा के काले कारनामों की परतें लगातार खुलती जा रही हैं। फर्जी प्रशासनिक अधिकारी बनकर लोगों को चूना लगाने वाली विप्रा शर्मा के खिलाफ अब एक और बड़ा मामला दर्ज हुआ है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 16 May 2026, 11:55 AM IST

Bareilly: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में खुद को आईएएस और एडीएम बताने वाली शातिर ठग विप्रा शर्मा के काले कारनामों की परतें लगातार खुलती जा रही हैं। फर्जी प्रशासनिक अधिकारी बनकर लोगों को चूना लगाने वाली विप्रा शर्मा के खिलाफ अब एक और बड़ा मामला दर्ज हुआ है। इस बार बरेली के किला थाने में पीड़ित ने सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये हड़पने का गंभीर आरोप लगाया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केस दर्ज कर जांच तेज कर दी है।

लेखपाल बनाने के नाम पर लिया 8.35 लाख का 'ठेका'

यह पूरा मामला किला थाना क्षेत्र के रोठा निवासी इंद्रपाल सिंह से जुड़ा है। पीड़ित इंद्रपाल सिंह ने किला इंस्पेक्टर संतोष कुमार को अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि करीब तीन-चार साल पहले उनकी मुलाकात अमित कुमार और उसके पिता राघवेंद्र नाम के दो व्यक्तियों से हुई थी। इन दोनों ने इंद्रपाल के बेटे शुभम को राजस्व विभाग में लेखपाल के पद पर सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया। दोनों बिचौलियों ने इसके एवज में आठ लाख रुपये के खर्चे की बात कही, जिसके जाल में पीड़ित परिवार आसानी से फंस गया।

सीबीगंज में रची गई साजिश, फर्जी एडीएम बनकर मिली विप्रा

पीड़ित को पूरी तरह अपने विश्वास में लेने के लिए अमित और राघवेंद्र ने उसे सीबीगंज थाना क्षेत्र के स्लीपर रोड पर बुलाया। यहाँ उनकी मुलाकात मुख्य आरोपी विप्रा शर्मा से कराई गई। विप्रा शर्मा ने रौब झाड़ते हुए खुद को एडीएम (प्रशासनिक अधिकारी) बताया और पूरी गारंटी के साथ शुभम की लेखपाल की नौकरी लगवाने का वादा किया। विप्रा के झांसे में आकर पीड़ित ने आरोपियों को कुल 7.25 लाख रुपये नकद सौंप दिए। कुछ समय बाद आरोपियों ने शुभम के हाथ में उत्तर प्रदेश शासन की ओर से जारी एक नियुक्ति पत्र थमा दिया, जो पूरी तरह फर्जी था।

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आचार संहिता और तबादले का बहाना बनाकर फिर वसूले पैसे

फर्जी नियुक्ति पत्र मिलने के बाद जब शुभम को जॉइनिंग नहीं मिली, तो पीड़ित परिवार ने आरोपियों से संपर्क साधा। इस पर शातिर ठगों ने लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने का बहाना बनाकर मामला टाल दिया। आचार संहिता खत्म होने के बाद भी जब नौकरी नहीं लगी, तो आरोपियों ने एक नया पैंतरा चला। उन्होंने राजस्व परिषद के सचिव का तबादला होने की बात कही और काम दोबारा शुरू कराने के नाम पर 1.10 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग की। विवश होकर पीड़ित ने यह रकम भी दे दी।

इंटरनेट पर खुली पोल, 12 से ज्यादा मामले हैं दर्ज

बीते 17 अप्रैल 2026 को आरोपियों ने शुभम के नाम से राजस्व विभाग का एक और नियुक्ति पत्र थमाया। बार-बार टालमटोल से परेशान होकर जब शुभम ने इंटरनेट के जरिए उस नियुक्ति पत्र की ऑनलाइन पड़ताल की, तो उसके होश उड़ गए। वह पत्र पूरी तरह फर्जी था और परिवार ठगी का शिकार हो चुका था।

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किला इंस्पेक्टर संतोष कुमार ने बताया कि पीड़ित की तहरीर पर विप्रा शर्मा, अमित और राघवेंद्र के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। गौरतलब है कि फर्जी आईएएस विप्रा शर्मा और उसकी बहनों के खिलाफ बरेली के अलग-अलग थानों में अब तक ठगी के 12 से अधिक मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।

Location :  Bareilly

Published :  16 May 2026, 11:55 AM IST