पुराना केस, लेकिन सजा से नहीं बच पाए आरोपी! हत्या के प्रयास में तीन दोषी, कोर्ट ने भेजा 7 साल के लिए जेल

गोरखपुर की अदालत ने करीब नौ साल पुराने हत्या के प्रयास के मामले में तीन अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने तीनों पर कुल 51 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। पुलिस ने इसे ऑपरेशन कनविक्शन के तहत प्रभावी पैरवी की सफलता बताया है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 7 September 2026, 7:23 PM IST

Gorakhpur: करीब नौ साल पहले दर्ज हुए हत्या के प्रयास के मामले में आखिरकार अदालत का फैसला आ गया। गोरखपुर की अदालत ने मामले में तीन अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने तीनों दोषियों पर कुल 51 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। लंबे समय से चल रहे इस मामले में फैसला आने के बाद गोरखपुर पुलिस ने इसे “ऑपरेशन कनविक्शन” अभियान के तहत प्रभावी पैरवी की बड़ी सफलता बताया है।

मामला वर्ष 2017 में गोला थाना क्षेत्र में दर्ज हुआ था। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास और गाली-गलौज से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। इसके बाद मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और प्रभावी पैरवी के आधार पर अदालत ने तीनों को दोषी माना।

2017 में दर्ज हुआ था मुकदमा

पुलिस के अनुसार, गोला थाने में मु0अ0सं0-105/2017 दर्ज किया गया था। मामले में अभियुक्तों के खिलाफ धारा 504 तथा 307/34 भादवि के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने मामले की विवेचना करते हुए उपलब्ध साक्ष्यों को जुटाया और जांच पूरी होने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। करीब नौ साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब अदालत ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया है।

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इन तीन आरोपियों को अदालत ने माना दोषी

न्यायालय ASJ/EC Act, गोरखपुर ने मामले में सर्वेन्दु तिवारी उर्फ गुड्डू पुत्र कैलाश तिवारी निवासी पुरादयाल, थाना गोला, जितेन्द्र सिंह पुत्र स्व. राजनारायण सिंह निवासी बाथबुजुर्ग, थाना गोला और रणजीत सिंह पुत्र स्व. राजनारायण सिंह निवासी बाथबुजुर्ग, थाना गोला को दोषी ठहराया। अदालत ने तीनों को सात वर्ष के सश्रम कारावास के साथ अर्थदंड से भी दंडित किया। पुलिस के मुताबिक, तीनों अभियुक्तों पर कुल 51 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।

ऑपरेशन कनविक्शन के तहत हुई प्रभावी पैरवी

गोरखपुर पुलिस ने अदालत के इस फैसले को “ऑपरेशन कनविक्शन” अभियान से जोड़ते हुए महत्वपूर्ण सफलता बताया है। पुलिस के अनुसार उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक के स्तर से चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य पुराने और गंभीर आपराधिक मामलों में प्रभावी अभियोजन के जरिए दोषियों को अदालत से सजा दिलाना है। इसी अभियान के तहत गोरखपुर में भी पुराने मामलों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।

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अभियोजन की पैरवी से हुई दोषसिद्धि

मामले में अभियुक्तों की दोषसिद्धि में अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी का भी पुलिस ने उल्लेख किया है। पुलिस के अनुसार SPP धीरेन्द्र जायसवाल और SPP सतीश चन्द्र यादव ने मामले में प्रभावी पैरवी की। पुलिस का कहना है कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों को मजबूती से न्यायालय के सामने रखा गया। इसी के आधार पर अदालत ने तीनों अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।

पुराने मामलों में सजा दिलाने पर जोर

गोरखपुर पुलिस के मुताबिक “ऑपरेशन कनविक्शन” के तहत पुराने आपराधिक मामलों की लगातार समीक्षा की जा रही है। खासकर गंभीर अपराधों से जुड़े मुकदमों में अभियोजन की स्थिति, गवाहों की पैरवी और न्यायालय में प्रभावी प्रस्तुतीकरण पर निगरानी रखी जा रही है। पुलिस का कहना है कि किसी आपराधिक मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद केवल गिरफ्तारी और विवेचना तक कार्रवाई सीमित नहीं रहनी चाहिए।

Location :  Gorakhpur

Published :  7 September 2026, 7:23 PM IST