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यौन उत्पीड़न के आरोपों से जूझ रहे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर बडड़ी खबर है। अविमुक्तेश्वरानंद की मेडिकल रिपोर्ट सामने आ गई है, जिसमें बड़ा खुलासा हुआ है।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
Lucknow: उत्तर प्रदेश में चर्चित शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। पीड़ित बटुकों की कराई गई मेडिकल जांच की रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले ने गंभीर मोड़ ले लिया है। मेडिकल रिपोर्ट में बटुकों के साथ यौन शोषण और जबरन कृत्य किए जाने की पुष्टि होने की बात कही जा रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पीड़ितों के साथ जबरदस्ती किए जाने के संकेत मिले हैं, जिससे आरोपों को बल मिला है।
पीड़ित बटुकों ने आरोप लगाया है कि गुरु दीक्षा के नाम पर उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उनका कहना है कि आश्रम में धार्मिक शिक्षा के बहाने उनके साथ आपत्तिजनक हरकतें की गईं। दो बटुकों ने बयान दिया है कि उन्हें कई बार अकेले बुलाया जाता था और उनके साथ जबरन अनुचित कृत्य किए जाते थे।
पीड़ितों का यह भी आरोप है कि उन्हें अन्य लोगों के सामने पेश किया जाता था और फिर उनके साथ गलत व्यवहार किया जाता था। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान उन्हें डराया-धमकाया गया ताकि वे किसी से शिकायत न करें।
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शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वे अकेले पीड़ित नहीं हैं। उनके अनुसार करीब 20 अन्य बटुक भी इसी तरह की प्रताड़ना का शिकार हुए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच के दायरे में है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान और बयान दर्ज करने की प्रक्रिया में जुटी हुई हैं।
पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया कि मठ परिसर में बाहरी लोगों का आना-जाना लगा रहता था, जिनमें प्रभावशाली और कथित तौर पर सफेदपोश लोग भी शामिल थे। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।
इस मामले में आशुतोष महाराज नामक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज करवाई थी। अदालत के आदेश के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके एक शिष्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
फिलहाल आरोपित पक्ष की ओर से सभी आरोपों को निराधार बताया गया है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से कहा गया है कि यह साजिश के तहत लगाया गया आरोप है और सच्चाई जांच के बाद सामने आएगी।
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मेडिकल रिपोर्ट के सामने आने के बाद मामले की गंभीरता बढ़ गई है। अब आगे की जांच, पीड़ितों के बयान और फॉरेंसिक साक्ष्य इस केस की दिशा तय करेंगे। समाज और प्रशासन की नजर इस बात पर है कि निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, जबकि निर्दोष को न्याय मिले।