
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एफआईआर कराने पहुंचे थे चंपत राय (Img: AI Generated Image)
Ayodhya: अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है, मामले को जहां अब तक केवल चोरी और गबन तक ही सीमित माना जा रहा वहीं अब एक नया दावा सामने आ रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल एक रिपोर्ट की मानें तो मंदिर में चोरी की सूचना 27 मई को ही ट्रस्ट और पुलिस को पता चल गई थी। जिसके बाद पुलिस द्वारा तत्काल प्रभाव से लवकुश, मनीष यादव, करुणेश और रामशंकर समेत 6 लोगों के खिलाफ एक्शन लेते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
सबसे बड़ा दावा यह है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय एफआईआर दर्ज कराने थाने पहुंचे थे, लेकिन एक फोन कॉल के बाद बिना शिकायत दिए वापस लौट गए। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
दावों के मुताबिक, 27 मई को ही चढ़ावे में गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी थी। इस दौरान लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, करुणेश, रामशंकर समेत छह लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की गई थी। बताया जा रहा है कि ट्रस्ट की ओर से भी मामले की जानकारी ली गई, लेकिन किसी कारण से उस समय औपचारिक एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। इसी वजह से अब यह सवाल उठ रहा है कि जब मामला शुरू में ही सामने आ गया था तो उसे सार्वजनिक होने से क्यों रोका गया।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चंपत राय एफआईआर कराने थाने पहुंचे थे। इसी दौरान ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने फोन पर उनकी किसी से बात कराई। बातचीत के बाद वह बिना तहरीर दिए वापस लौट आए। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर न तो ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक बयान आया है और न ही पुलिस ने इस दावे की पुष्टि की है।
करीब दस दिनों तक मामला सार्वजनिक नहीं हुआ। फिर 7 जून को समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडेय ने इस मुद्दे को उठाया। इसके अगले दिन सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर मामले को लेकर सवाल खड़े किए। इसके बाद यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया। विपक्ष ने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, जबकि सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी।
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जांच के दौरान पुलिस ने कोर्ट की अनुमति लेकर जेल में बंद आरोपियों से करीब दो घंटे तक पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार सबसे लंबी पूछताछ आरोपी अवनीश शुक्ला से हुई। बताया गया कि पूछताछ में आरोपियों ने करोड़ों रुपये की चोरी की बात स्वीकार करते हुए पूरी कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दी। इसी दौरान ट्रस्टी अनिल मिश्रा का नाम भी चर्चा में आया। हालांकि उनके खिलाफ अभी तक किसी अदालत ने दोष तय नहीं किया है और जांच जारी है।
पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि दान राशि की गिनती के दौरान चोरी बेहद योजनाबद्ध तरीके से की जाती थी। उन्हें पहले से पता रहता था कि सीसीटीवी कैमरे किस दिशा में लगे हैं। आरोप है कि एक व्यक्ति रकम निकालता था, जबकि बाकी लोग उसे घेरकर खड़े हो जाते थे ताकि कैमरे में गतिविधि साफ दिखाई न दे। बाद में रकम बाथरूम में छिपा दी जाती थी और मौका मिलने पर बाहर पहुंचा दी जाती थी। आरोपियों के ट्रस्ट से जुड़े होने के कारण उनकी तलाशी भी नहीं होती थी।
एसआईटी और पुलिस की जांच में आरोपियों के बैंक खातों में उनकी आय से कहीं अधिक रकम के लेनदेन का दावा किया गया है। पुलिस ने सभी आरोपियों और उनके परिजनों के खातों का विवरण बैंकों से मांगा है। इसके अलावा मकान, प्लॉट, हॉस्टल और अन्य संपत्तियों का भी ब्योरा जुटाया जा रहा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन संपत्तियों के लिए पैसा कहां से आया।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अगली बैठक 6 जुलाई को होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि इस बैठक में पूरे प्रकरण पर विस्तार से चर्चा होगी। साथ ही ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और आगे की कार्रवाई पर भी निर्णय लिया जा सकता है।
दूसरी तरफ, धर्म सेना भारत ने आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाने की मांग की है। संगठन ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजकर दोषियों की संपत्ति जब्त करने, निष्पक्ष जांच कराने और कड़ी सजा देने की मांग की है। संगठन के अनुसार, मंदिर से जुड़े आर्थिक अपराधों से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था प्रभावित हुई है। वहीं जांच एजेंसियां लगातार साक्ष्य जुटाने में लगी हैं और पूरे मामले की जांच अभी जारी है।
Location : Ayodhya
Published : 1 July 2026, 3:29 PM IST