जनता का पैसा आखिर गया कहां? PWD पर गंभीर आरोपों से मचा बवाल, अब जांच की मांग ने बढ़ाई हलचल

गोरखपुर में पीडब्ल्यूडी के एक अधिकारी पर लगे गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। प्रेस वार्ता में कई ऐसे दावे किए गए, जिनसे सरकारी कार्यों की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। समिति ने बड़े स्तर की जांच की मांग की है।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 20 July 2026, 6:46 PM IST

Gorakhpur: गोरखपुर में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों ने प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। रविवार को गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान पूर्वांचल ठेकेदार जन कल्याण समिति ने विभाग के एक अधिशासी अभियंता स्तर के अधिकारी पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए। समिति ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि अगर जांच हुई तो कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।

सरकारी धन के दुरुपयोग का लगाया आरोप

समिति के अध्यक्ष सभापति पाठक ने दावा किया कि संबंधित अधिकारी लंबे समय तक गोरखपुर के विभिन्न निर्माण खंडों में तैनात रहे। इस दौरान सरकारी परियोजनाओं में बजट की कथित हेराफेरी, अतिरिक्त मद दिखाकर भुगतान कराने और विभागीय नियमों की अनदेखी कर कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने जैसी अनियमितताएं हुईं। उनका आरोप है कि करोड़ों रुपये के विकास कार्यों में वित्तीय गड़बड़ियां हुई हैं, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा।

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निर्माण कार्यों और भुगतान की जांच की मांग

प्रेस वार्ता में समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि संबंधित अधिकारी के कार्यकाल में हुए सभी निर्माण कार्यों, भुगतान प्रक्रिया और प्रशासनिक निर्णयों की गहराई से जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच से पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है और अगर कहीं अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

होटल निर्माण और निवेश पर भी उठे सवाल

समिति ने प्रेस वार्ता के दौरान एक कथित आलीशान होटल के निर्माण का भी मुद्दा उठाया। पदाधिकारियों ने मांग की कि होटल के निर्माण में लगाए गए निवेश और उसकी आय के स्रोत की भी जांच कराई जाए। उनका कहना है कि अगर सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होगी तो कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।

लखनऊ तक पहुंची शिकायत

समिति ने बताया कि पूरे मामले की विस्तृत लिखित शिकायत प्रमुख अभियंता (विकास एवं विभागाध्यक्ष), लोक निर्माण विभाग, उत्तर प्रदेश, लखनऊ को भेजी जा चुकी है। शिकायत में विभागीय अभिलेखों की जांच, वित्तीय लेन-देन का ऑडिट और किसी स्वतंत्र एजेंसी से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की गई है।

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कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि अगर समय रहते निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन शुरू किया जाएगा। उनका कहना है कि यह मामला केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता के धन की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है।

Location :  Gorakhpur

Published :  20 July 2026, 6:46 PM IST