DN Exclusive: बाजार में बिक रहा जहर? मुनाफे के लिए सेहत से खिलवाड़…मिलावट का सच कितना डरावना?

इस भागदौड़ भरी दुनिया में सबसे बड़ा खतरा! कहीं आप भी तो नहीं खा रहे हैं यह ज़हर? कृपया सावधान हो जाएं, ये चीजें धीरे-धीरे आपके स्वास्थ्य के अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। सबसे बड़ा सवाल आखिर थाली में जहर क्यों परोसा जा रहा और कब थामेगा मुनाफे का खेल है?

Updated : 24 May 2026, 7:38 PM IST
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News Delhi: इस भागदौड की दुनिया में सबसे बड़ा खतरा अब खाने-पीने पर दिख रहा है। रंग स्वाद और मुनाफे की दौड़ में आज बाजार का एक कड़वा सच सामने आ रहा है। दूध से लेकर मसाले , मिठाई, तेल घी और रोजमर्रा की खाने पीने की चीजों में मिलावट के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल आखिर थाली में जहर क्यों परोसा जा रहा और कब थामेगा मुनाफे का खेल है?

बढ़ती मांग के समय मिलावटखोर सक्रिय

दरअसल, त्योहारों और बढ़ती मांग के समय मिलावटखोर सबसे ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं। नकली खोया सिंथेटिक दूध, मिलावटी मसाले और घटिया तेल खुलेआम बेचे जाते हैं। सस्ते केमिकल और नकली सामग्री मिलाकर ज्यादा मुनाफा कमाने की होड़ में लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है।

शरीर पर गंभीर

जानकारी के मुताबित, मिलावटी खाने वाले पदार्थ शरीर पर गंभीर असर डाल सकते हैं। ऐसे में पेट की बीमारी , एलर्जी, लिवर और किडनी से जुड़ी समस्या हो सकती है, इसके बावजूद बाजार में मिलावट का नेटवर्क खत्म होता नहीं दिख रहा।

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सबसे ज्यादा सक्रिय क्षेत्र पश्चिमी यूपी

इन शहरों में दूध, मिठाई, घी और तेल में मिलावट के कई केस पकड़े गए हैं। त्योहारों के समय नकली खोया और मिठाइयों की सप्लाई भी सामने आती है।

लखनऊ और आसपास के इलाके

राजधानी में कई बार मिलावटी मसाले, पनीर और तेल पकड़े गए हैं। होटलों और पैकेज्ड फूड सप्लाई पर भी समय-समय पर कार्रवाई हुई है।

पूर्वी यूपी

वाराणसी, गोरखपुर, जौनपुर, आजमगढ़ यहां खुले बाजारों में नकली दूध, पनीर और बेसन जैसे केस सामने आते रहे हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र झांसी, बांदा, चित्रकूट यहाँ छोटे स्तर पर स्थानीय मिलावट और अनहाइजीनिक फूड प्रोडक्शन के मामले मिलते हैं।

त्योहारों के समय पूरे यूपी में बढ़ोतरी दीपावली, होली और शादी सीजन में मिलावट के केस पूरे राज्य में अचानक बढ़ जाते हैं, खासकर मिठाई और डेयरी प्रोडक्ट्स में।

मिलावटखोरों के हौसले बुलंद

बड़ा सवाल प्रशासन और निगरानी व्यव्स्था पर भी उठता है। छापेमारी और कार्रवाई की खबरे आती हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद वही खेल फिर शुरू हो जाता है। क्या जांच व्यवस्था कमजोर है या फिर मिलावटखोरों के हौसले बुलंद हैं?

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मुनाफे के खेल पर लगाम कब?

वहीं लोगों को भी जागरुक होने की जरुरत है उपभोक्ताओं को खरीदारी के समय गुणवत्ता, पैकिंग, लाइसेंस और उत्पाद की जांच पर ध्यान होगा। साथ ही प्रशासन को नियमित जांच, कड़ी सजा और पारदर्शाी कार्रवाई  करनी होगी। यह सिर्फ मिलावट नहीं बल्कि भरोसे और सेहत के साथ धोखा है। जब खाने की थाली ही सुरक्षित न रहे, तब भरोसे और सेहत के साथ धोखा है। सावल सिर्फ कानून से नहीं बल्कि समाज पर भी बनता है क्योंकि खुद को सुरक्षित रखना यह खुद की जिम्मेदारी भी बनती है कि आज के समय में ऐसे मिलावटी चीजों से सावधान रहे। डाइनामाइट न्यूज का बड़ा सवाल की आखिर ये मिलावट कब बंद होगी?

Location :  New Delhi

Published :  24 May 2026, 7:38 PM IST

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