
राम मंदिर अयोध्या (Img: X)
Ayodhya: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की राशि को लेकर चल रहे विवाद की जांच अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। विशेष जांच दल यानी SIT को अपनी जांच के दौरान कुछ ऐसे CCTV फुटेज मिले हैं, जिनसे चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी के मामले में अहम सुराग मिलने की बात सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक फुटेज में कुछ संदिग्ध लोग रकम से जुड़ी गतिविधियों में दिखाई दे रहे हैं। जांच टीम अब इन वीडियो की बारीकी से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि पूरी प्रक्रिया में कहां और किस स्तर पर गड़बड़ी हुई। इसके अलावा SIT को राम मंदिर ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध मिली है। जांच पूरी होने के बाद टीम व्यवस्थाओं में बड़े बदलाव की सिफारिश कर सकती है।
सूत्रों के अनुसार, छह दिनों तक चली SIT की जांच में CCTV फुटेज सबसे अहम सबूतों में शामिल रहे हैं। जांच टीम ने मंदिर परिसर और चढ़ावे की राशि से जुड़े स्थानों के कैमरों की रिकॉर्डिंग को खंगाला। जांच में ऐसे संकेत मिलने की बात कही जा रही है कि कुछ संदिग्ध लोगों ने रकम के साथ हेरफेर किया। हालांकि अंतिम निष्कर्ष SIT की रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा। जांच टीम इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि चढ़ावे की निगरानी और गणना की प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे और किसकी जिम्मेदारी तय होती है।
SIT को जांच के दौरान CCTV फुटेज से छेड़छाड़ किए जाने के संकेत मिलने की बात भी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक कुछ रिकॉर्डिंग हटाए जाने या उनमें बदलाव की आशंका जताई गई है। SIT ने इसे अपनी जांच में गंभीरता से शामिल किया है। जांच टीम अब दो पहलुओं पर काम कर रही है। पहला, अगर किसी कर्मचारी या अधिकारी से निगरानी में लापरवाही हुई तो उसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। दूसरा, अगर जानबूझकर फुटेज हटाई गई या छेड़छाड़ की गई तो इसे साजिश के तौर पर देखा जाएगा।
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जांच के दौरान कुछ ऐसे लोग भी सामने आए हैं जिन्होंने मंदिर निर्माण और अन्य व्यवस्थाओं में ट्रस्ट पदाधिकारियों पर कमीशनखोरी के आरोप लगाए हैं। सूत्रों के अनुसार सबसे ज्यादा आरोप अनिल मिश्र को लेकर सामने आए हैं। गवाहों ने SIT को कुछ दस्तावेज और अन्य सबूत सौंपने की बात कही है। इन आरोपों में 40 फीसदी तक कमीशन लेने की बात सामने आने का दावा किया जा रहा है। SIT अब इन दावों की पुष्टि के लिए मिले दस्तावेजों और बयानों की जांच कर रही है।
जांच के बाद SIT राम मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था को लेकर भी सुझाव दे सकती है। सूत्रों के अनुसार टीम श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर एक कार्यपालक अधिकारी की नियुक्ति की सिफारिश कर सकती है, ताकि मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था ज्यादा पारदर्शी तरीके से चल सके। इसके अलावा ट्रस्ट के कामकाज में जिम्मेदारी तय करने और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने को लेकर भी सुझाव दिए जा सकते हैं।
चढ़ावा मामले की जांच कर रही SIT ट्रस्ट से जुड़े कई पदाधिकारियों से पूछताछ कर चुकी है। जांच टीम ने मंदिर प्रबंधन, बैंक से जुड़े अधिकारियों, गणना करने वाले कर्मचारियों और अन्य लोगों के बयान दर्ज किए हैं। अब जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।
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इस पूरे मामले के बीच शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे ने भी चर्चाओं को हवा दी। राम मंदिर में दर्शन-पूजन के दौरान मुख्यमंत्री और ट्रस्ट महासचिव चंपत राय के बीच सार्वजनिक रूप से कोई खास बातचीत या संयुक्त मौजूदगी नजर नहीं आई। इसके बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि ट्रस्ट या प्रशासन की ओर से इस विषय में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं आयोजन से जुड़े लोग इसे धार्मिक कार्यक्रम बताते हुए अपनी तैयारियों में जुटे हैं।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद अब सिर्फ दान राशि तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था और जिम्मेदारी तय करने तक पहुंच गया है। SIT की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा कि इस मामले में कौन जिम्मेदार है और किन लोगों पर कार्रवाई होगी। फिलहाल अयोध्या से लेकर लखनऊ तक सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।
Location : Ayodhya
Published : 21 June 2026, 9:45 AM IST