
जिला कृषि अधिकारी ने तस्करी की आशंका में दर्ज कराया मुकदमा (Img: AI Generated Image)
Maharajganj: भारत-नेपाल सीमा पर अनुदानित खाद की तस्करी रोकने को लेकर ठूठीबारी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थिति यह है कि सीमा क्षेत्र में संदिग्ध तरीके से रखी गई यूरिया खाद का मामला पुलिस की सक्रियता से नहीं, बल्कि जिला कृषि अधिकारी की जांच के बाद सामने आया।
राजाबारी गांव में 24 बोरी अनुदानित यूरिया मिलने के बाद कृषि विभाग ने जांच की और प्रथम दृष्टया खाद को अवैध रूप से भंडारित कर नेपाल तस्करी किए जाने की आशंका जताई।
मामले में जिलाधिकारी की अनुमति के बाद पट्टू कन्नौजिया पुत्र रामदेव और बृजेश उर्फ चिनक यादव पुत्र कमल यादव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। कृषि विभाग की रिपोर्ट में उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985, उर्वरक मूवमेंट कंट्रोल ऑर्डर-1973 और आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के प्रावधानों के उल्लंघन का उल्लेख किया गया है।
मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर राजाबारी गांव में जांच के दौरान बृजेश उर्फ चिनक यादव के घर के सामने से नौ बोरी और पट्टू कन्नौजिया के घर के सामने से 15 बोरी यूरिया बरामद हुई। कुल 24 बोरी खाद मिलने के बाद उसे पुलिस अभिरक्षा में लेकर ठूठीबारी थाने में सुरक्षित रखवाया गया। 24 अगस्त को जिला कृषि अधिकारी शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने थाने पहुंचकर बरामद खाद का निरीक्षण किया। इसके बाद पुलिसकर्मियों के साथ राजाबारी गांव पहुंचकर दोनों स्थानों पर जांच की गई।
जांच के दौरान पट्टू कन्नौजिया से 15 बोरी यूरिया के बारे में जानकारी मांगी गई। उसने बताया कि खाद खेत में इस्तेमाल करने के लिए खरीदी गई है। लेकिन जब कृषि भूमि के कागजात और खाद खरीदने की रसीद मांगी गई तो वह कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।
उसने कुछ लोगों की जमीन रेहन पर लेकर खेती करने की बात कही, लेकिन जांच के दौरान वह संबंधित किसानों के नाम, खेत का स्थान और बोई गई फसल तक की स्पष्ट जानकारी नहीं दे पाया। खाद कहां से खरीदी गई और किस विक्रेता से लाई गई, इसका भी कोई प्रमाण नहीं दिया गया। कृषि विभाग की रिपोर्ट में इन परिस्थितियों को संदिग्ध मानते हुए प्रथम दृष्टया अनुदानित यूरिया को अवैध रूप से भंडारित किए जाने की आशंका जताई गई।
इसके बाद टीम बृजेश उर्फ चिनक यादव के घर पहुंची। मौके पर उसकी पत्नी प्रमिला यादव मिलीं। उन्होंने बताया कि घर के सामने रखी नौ बोरी यूरिया परिवार के खेत में इस्तेमाल के लिए लाई गई थी। परिवार के पास करीब तीन बीघा जमीन होने की बात कही गई।
हालांकि खाद की खरीद से संबंधित रसीद और विक्रेता की जानकारी मांगे जाने पर कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया। बृजेश को अपना पक्ष रखने और संबंधित कागजात प्रस्तुत करने का अवसर भी दिया गया, लेकिन निर्धारित समय तक कोई दस्तावेज या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया।
जिला कृषि अधिकारी शैलेन्द्र प्रताप सिंह की जांच रिपोर्ट में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर दोनों व्यक्तियों द्वारा अनुदानित यूरिया को कहीं से लाकर अवैध रूप से भंडारित और परिसंचलित किए जाने की प्रथम दृष्टया आशंका जताई गई है। सीमा क्षेत्र होने के कारण खाद को नेपाल तस्करी किए जाने की आशंका भी रिपोर्ट में दर्ज की गई है। कृषि विभाग के अनुसार इस तरह अनुदानित खाद के अवैध कारोबार से सरकारी व्यवस्था प्रभावित होने के साथ राजस्व की क्षति भी हो सकती है।
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जिला कृषि अधिकारी ने मामले की गोपनीय जांच कराने के बाद 25 अगस्त को जिलाधिकारी को पूरी वस्तुस्थिति से अवगत कराया और दोनों नामजद लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की अनुमति मांगी। जिलाधिकारी की मंजूरी के बाद 29 अगस्त को दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया।
Location : Maharajganj
Published : 8 September 2026, 10:34 AM IST
Topics : Fertilizer scam India Nepal border Maharajganj News (महाराजगंज न्यूज़) UP News Urea Smuggling