Indradev Singh Murder Case: 24 साल बाद इंसाफ मिला… पूर्व बार अध्यक्ष हत्याकांड में अदालत का बड़ा फैसला, तीन दोषियों को उम्रकैद

लखनऊ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष इंद्रदेव सिंह की हत्या के बहुचर्चित मामले में 24 साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। लंबे इंतजार के बाद तीन दोषियों को उम्रकैद और भारी जुर्माने की सजा मिली है। आखिर यह मामला कैसे शुरू हुआ, जांच सीबीआई तक क्यों पहुंची।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 7 July 2026, 6:39 PM IST

Lucknow: करीब 24 वर्ष पुराने और चर्चित इंद्रदेव सिंह हत्याकांड में आखिरकार अदालत का फैसला आ गया। लखनऊ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रदेव सिंह की हत्या के मामले में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश वायु नंदन मिश्रा की अदालत ने मंगलवार को तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने तीनों दोषियों पर कुल डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

इस फैसले के साथ वर्षों से चल रही न्यायिक प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गई। लंबे समय से इस मामले पर नजर बनाए हुए कानूनी जगत में भी अदालत के इस निर्णय की चर्चा रही।

दिनदहाड़े हुई थी हत्या

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 8 अगस्त 2002 को शाम करीब चार बजे से साढ़े चार बजे के बीच कैसरबाग टेलीफोन एक्सचेंज के पीछे अधिवक्ता इंद्रदेव सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना ने उस समय पूरे लखनऊ में सनसनी फैला दी थी। हत्या के बाद उनकी पत्नी नयनतारा सिंह ने कैसरबाग थाने में मुकदमा दर्ज कराया। उन्होंने अपनी शिकायत में रामकुमार वर्मा, सुरेश वर्मा, सुरजन वर्मा, सुरेश वर्मा उर्फ डॉक्टर और सुषमा वर्मा को नामजद करते हुए हत्या का आरोप लगाया था।

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सरकार की संस्तुति पर सीबीआई को सौंपी गई जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार की संस्तुति पर इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गई। जांच एजेंसी ने मामले की विस्तृत विवेचना की और कई अहम तथ्यों को सामने लाया। सीबीआई की जांच में मन्नालाल गुप्ता, वेद प्रकाश उर्फ नेता, विक्रम यादव उर्फ कालिया, छोटेलाल, छोटू, बृजेश यादव उर्फ मुन्ना और पन्ना सिंह के नाम सामने आए। इसके बाद एजेंसी ने वर्ष 2004 में अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया।

तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा

मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने विक्रम यादव उर्फ कालिया, पन्ना सिंह और बृजेश यादव उर्फ मुन्ना को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) तथा 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी करार दिया। मंगलवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए अदालत ने तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही उन पर डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

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सुनवाई के दौरान तीन आरोपितों की हो चुकी है मृत्यु

इस लंबे समय तक चले मुकदमे के दौरान मामले से जुड़े अन्य तीन आरोपितों की मृत्यु हो चुकी है। इसी कारण उनके खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। करीब दो दशक से अधिक समय तक चले इस मामले में अदालत का फैसला अब सामने आने के बाद इसे एक महत्वपूर्ण कानूनी निर्णय माना जा रहा है।

परिवार से जुड़े हैं कई प्रमुख नाम

स्वर्गीय इंद्रदेव सिंह का परिवार भी सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहा है। उनकी बेटी लक्ष्मी सिंह वर्तमान में नोएडा की पुलिस आयुक्त हैं, जबकि उनके दामाद राजेश्वर सिंह लखनऊ की सरोजनीनगर विधानसभा सीट से विधायक हैं।

Location :  Lucknow

Published :  7 July 2026, 6:39 PM IST