24 घंटे से ज्यादा हिरासत तो देना होगा हर दिन 25 हजार! हाईकोर्ट के इस फैसले से पुलिस महकमे में हलचल

अगर किसी व्यक्ति को कानून के तय समय से ज्यादा हिरासत में रखा जाए तो उसकी कीमत कितनी भारी पड़ सकती है? इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक हालिया फैसले ने इस सवाल का ऐसा जवाब दिया है, जिसने पुलिस व्यवस्था में हलचल बढ़ा दी है।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 10 June 2026, 6:03 PM IST

Prayagraj: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि अगर किसी व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक समय तक अवैध रूप से हिरासत में रखा जाता है, तो उसे 25 हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मुआवजा दिया जाएगा।

अदालत ने यह भी कहा कि विभागीय जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों से यह राशि उनके वेतन से वसूली जाएगी।

बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर आया बड़ा फैसला

यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने कहा कि किसी भी नागरिक की स्वतंत्रता संविधान द्वारा संरक्षित अधिकार है और इसका उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति के साथ निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। अदालत ने इसे गंभीर मामला मानते हुए भविष्य के लिए भी व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

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गाजियाबाद के मामले से जुड़ा है पूरा विवाद

मामला गाजियाबाद के टीला मोड़ थाना क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार, चौकी प्रभारी राजेंद्र सिंह ने 22 फरवरी 2026 को दिव्यांग अधिवक्ता चंद्रपाल सिंह को हिरासत में लिया था। आरोप है कि उन्हें 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया, जबकि यह कानूनन अनिवार्य प्रक्रिया है। याचिका में यह भी कहा गया कि संबंधित व्यक्ति ने बॉन्ड भरने की प्रक्रिया पूरी कर ली थी, इसके बावजूद उन्हें जेल भेज दिया गया। बाद में मामला हाईकोर्ट पहुंचा और बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की गई।

कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद मिली रिहाई

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा। न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद 25 फरवरी 2026 को चंद्रपाल सिंह को रिहा कर दिया गया। कोर्ट ने माना कि उन्हें तीन दिन तक अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। इस आधार पर अदालत ने पीड़ित को 75 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। यह राशि 25 हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से तय की गई है।

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दोषी अधिकारियों से होगी वसूली

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मुआवजे की राशि सरकारी खजाने पर स्थायी बोझ नहीं बनेगी। विभागीय जांच पूरी होने के बाद अगर अधिकारी दोषी पाए जाते हैं तो यह रकम उनसे वसूली जाएगी। अदालत ने एसीपी शालीमार गार्डन और एसएचओ टीला मोड़ की भूमिका की जांच के निर्देश दिए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

डीजीपी को जारी हुआ विशेष निर्देश

न्यायालय ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि राज्य के सभी जिला पुलिस प्रमुखों को सर्कुलर जारी कर इस आदेश की जानकारी दी जाए और इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाए। अदालत का मानना है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पुलिस अधिकारियों को संवैधानिक अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं के प्रति अधिक संवेदनशील बनाना आवश्यक है।

14 सितंबर तक मांगी गई रिपोर्ट

हाईकोर्ट ने मामले की निगरानी जारी रखते हुए पुलिस आयुक्त गाजियाबाद को 14 सितंबर 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इस रिपोर्ट में आदेश के पालन और विभागीय जांच की प्रगति का विवरण शामिल होगा।

Location :  Prayagraj

Published :  10 June 2026, 6:03 PM IST