गोरखपुर में खाकी पर बड़ा कलंक: लिफ्ट देने के बहाने मासूम को बनाया हवस का शिकार, आरोपी सिपाही बर्खास्त

गोरखपुर में 10 साल की मासूम से दुष्कर्म और हत्या के आरोपी सिपाही अभिषेक यादव को एसएसपी ने सेवा से बर्खास्त कर दिया है। उस पर एनएसए की कार्रवाई और केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने की तैयारी है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 31 July 2026, 3:52 PM IST

Gorakhpur: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाली एक बेहद खौफनाक और शर्मनाक घटना सामने आई है, जहां कानून की रक्षा करने की जिम्मेदारी उठाने वाला एक खाकीधारी ही मासूमों का भक्षक बन बैठा। जिले में एक 10 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ पहले क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए दुष्कर्म किया गया और फिर उसकी गला घोटकर हत्या कर दी गई। इस जघन्य वारदात को किसी आम अपराधी ने नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश पुलिस के एक आरक्षी (सिपाही) अभिषेक यादव ने अंजाम दिया। इस सनसनीखेज घटना के सामने आने के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और स्थानीय जनता तथा अस्पताल के कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।

घटना का खौफनाक सच

यह पूरी घटना 28 जुलाई 2026 की है, जिसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया। आरोपी सिपाही अभिषेक यादव, जो कि 2018 बैच का आरक्षी है और वर्तमान में गोरखपुर में डायल 112 (पीआरवी) यूनिट में तैनात था, ने अपनी वर्दी और पद का गलत फायदा उठाया। पुलिस की शुरुआती जांच और खुलासों के मुताबिक, आरोपी ने जिला अस्पताल के पास से 10 साल की एक मासूम बच्ची को उसके घर सुरक्षित छोड़ने का झूठा झांसा दिया। अपनी बात पर विश्वास दिलाकर उसने बच्ची को अपनी मोटरसाइकिल पर बैठा लिया। इसके बाद वह उसे मुख्य शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर एक सुनसान और वीरान इलाके में ले गया, जहां उसने इस अमानवीय कृत्य को अंजाम दिया।

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पहचान छिपाने के लिए रची गई खूनी साजिश

दरिंदगी को अंजाम देने के बाद जब आरोपी को यह अहसास हुआ कि बच्ची उसे पहचान चुकी है और उसकी यह करतूत बाहर आ सकती है, तो उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए एक और खौफनाक कदम उठाया। अपनी नौकरी और गर्दन बचाने के लिए उसने बेरहमी से मासूम का गला घोटकर उसकी हत्या कर दी। सबूत मिटाने के इरादे से उसने मृत बच्ची के शव को एक नदी में फेंक दिया, ताकि किसी को उसकी भनक तक न लगे।

सीसीटीवी फुटेज से खुला राज और गिरफ्तारी

मासूम के लापता होने और हत्या के बाद पुलिस महकमे पर से पर्दा हटाने का दबाव बढ़ गया। पुलिस प्रशासन ने मामले की गंभीरता को समझते हुए सघन तलाशी अभियान शुरू किया। आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस टीम ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों के 200 से अधिक सीसीटीवी फुटेज की गहन और बारीकी से जांच की। इन डिजिटल सबूतों की मदद से आखिरकार पुलिस ने दरिंदे सिपाही की पहचान कर ली और उसे धर दबोचा। कड़ी पूछताछ के दौरान आरोपी अभिषेक यादव ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसकी निशानदेही पर ही पुलिस ने नदी से बच्ची का शव बरामद किया।

पुराना आपराधिक इतिहास और लापरवाही के सवाल

जांच के दौरान जब आरोपी सिपाही की कुंडली खंगाली गई, तो उसका पुराना आपराधिक इतिहास भी सामने आया, जिसने विभाग की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, इसी साल जनवरी 2025 में एक महिला से छेड़छाड़ और बदसलूकी करने के गंभीर आरोप में इस सिपाही को जेल भेजा गया था और निलंबित कर दिया गया था। हैरानी की बात यह है कि कुछ ही महीनों बाद, सितंबर 2025 में उसका निलंबन बहाल कर दिया गया और उसे दोबारा ड्यूटी पर तैनात कर दिया गया, जिसका नतीजा एक मासूम की जान के रूप में सामने आया।

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सिपाही बर्खास्त, अब लगेगी एनएसए

घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने बिना किसी देरी के सख्त से सख्त कदम उठाए हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) डॉ. कौस्तुभ् ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी के खिलाफ त्वरित विभागीय कार्रवाई की है और उसे सेवा से पूरी तरह बर्खास्त कर दिया है। एसएसपी डॉ. कौस्तुभ् ने दो टूक शब्दों में कहा है कि पुलिस विभाग में इस तरह के जघन्य अपराध करने वाले और मानवता को शर्मसार करने वाले किसी भी कर्मी को बख्शा नहीं जाएगा।

प्रशासन अब इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाने की पूरी तैयारी कर रहा है, ताकि आरोपी को जल्द से जल्द कड़ी सजा दिलाई जा सके। इसके साथ ही, आरोपी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत भी सख्त कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले में तेजी से तफ्तीश पूरी कर अदालत में एक मजबूत चार्जशीट दाखिल की जाएगी, ताकि समाज में यह संदेश जाए कि खाकी की आड़ में अपराध करने वालों के लिए कानून में कोई नरमी नहीं है।

Location :  Gorakhpur

Published :  31 July 2026, 3:52 PM IST