बिहार में 10 लाख से ज्यादा शिक्षकों-पुलिसकर्मियों की सैलरी पर संकट, त्योहार से पहले क्यों अटका वेतन?

बिहार में शिक्षकों और पुलिसकर्मियों के वेतन भुगतान पर जांच का असर पड़ा है। शिक्षा और पुलिस विभाग में कथित वेतन घोटाले, फर्जी आईडी और संदिग्ध बिलों के मामले सामने आने के बाद वित्त विभाग ने दस्तावेजों की जांच के निर्देश दिए हैं।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 15 October 2026, 3:22 PM IST
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Patna: बिहार में सरकारी शिक्षकों और पुलिसकर्मियों के वेतन को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। त्योहारों के मौसम में राज्य के लाखों कर्मचारियों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि वेतन भुगतान से पहले दस्तावेजों की जांच करने का फैसला लिया गया है। वजह है शिक्षा और पुलिस विभाग में वेतन से जुड़ी कथित वित्तीय गड़बड़ियां। शुरुआती जांच में फर्जी आईडी, गलत वेतन बिल और सरकारी खातों से संदिग्ध भुगतान के मामले सामने आए हैं।

आखिर क्यों रोका गया वेतन?

मिली जानकारी के अनुसार, महालेखाकार (AG) की जांच में शिक्षा और पुलिस विभाग के वेतन भुगतान में अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। इसके बाद वित्त सचिव विनय कुमार ने दोनों विभागों को पत्र भेजकर वेतन संबंधी दस्तावेजों की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

बताया गया है कि जांच पूरी होने और वेतन के रिकॉर्ड का मिलान होने के बाद ही अगला भुगतान जारी करने पर फैसला होगा। सरकार का जोर संदिग्ध भुगतान की पहचान करने, गलत तरीके से निकाली गई रकम की वसूली और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने पर है।

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पुलिस विभाग में कैसे हुआ कथित फर्जीवाड़ा?

जांच में एचआरएमएस (HRMS) और सीएफएमएस (CFMS) पोर्टल के जरिए वेतन भुगतान में गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि कर्मचारियों के रिकॉर्ड में गलत जानकारी दर्ज करके निर्धारित वेतन से अधिक राशि के बिल तैयार किए गए।

मेकर, चेकर और अप्रूवर की भूमिका भी जांच के दायरे में है। इन तीनों स्तरों पर जांच किए बिना बिल पास होने से सरकारी खजाने से अतिरिक्त भुगतान होने की आशंका जताई गई है। पटना, भागलपुर और औरंगाबाद समेत कई जिलों में इस तरह की गड़बड़ियों को लेकर प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी दी गई है।

शिक्षा विभाग में फर्जी आईडी से भुगतान का आरोप

शिक्षा विभाग में भी कथित अनियमितताओं की तस्वीर सामने आई है। आरोप है कि कुछ जगहों पर फर्जी पे-आईडी बनाई गईं और सॉफ्टवेयर में बदलाव करके वेतन से जुड़े आंकड़े बढ़ाए गए। सुपौल में 11 शिक्षकों की फर्जी आईडी तैयार कर भुगतान किए जाने का मामला सामने आया। आरोपों के मुताबिक, एचआरएमएस में मकान किराया भत्ता (HRA) और अन्य भत्तों से संबंधित आंकड़ों में भी हेरफेर की गई। शुरुआती जांच में करीब 5,000 संदिग्ध कर्मचारियों की पहचान किए जाने की बात कही गई है।

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पटना सिटी स्थित फतह नारायण सिंह अकादमी स्कूल में भी कथित तौर पर 76.71 लाख रुपये की अनियमितता सामने आई। वहीं, सुपौल के एक लिपिक पर अपनी मां और सास के खातों में 1.83 करोड़ रुपये भेजने का आरोप है। इन मामलों में अंतिम जिम्मेदारी जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।

अब कर्मचारियों को कब मिलेगा वेतन?

वित्त विभाग के निर्देश के अनुसार, शिक्षा और गृह विभाग को वेतन के दस्तावेजों की जांच करके रिपोर्ट देनी होगी। इसके बाद वेतन बिलों का कोषागार के रिकॉर्ड से मिलान किया जाएगा। एचआरएमएस और सीएफएमएस के रिकॉर्ड दुरुस्त करने के बाद भुगतान पर आगे का फैसला लिया जाएगा।

Location :  Patna

Published :  15 October 2026, 3:22 PM IST

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