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कोषाध्यक्ष के बयान से बढ़ी हलचल (Img: Pinterest)
Ayodhya: अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावा चोरी और कथित धन गबन मामले ने फिर नया मोड़ ले लिया है। इस बार विवाद के केंद्र में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी का बयान है। एक मीडिया चैनल को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे की निगरानी की जिम्मेदारी ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा के पास थी। इस बयान के सामने आने के बाद पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
स्वामी गोविंद देव गिरी ने स्पष्ट कहा कि चढ़ावे की निगरानी का कार्य अनिल मिश्रा देख रहे थे। चूंकि वे स्वयं ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष हैं, इसलिए उनके इस बयान को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि चढ़ावे की निगरानी किसी अन्य सदस्य के पास थी, तो वित्तीय जवाबदेही किस स्तर पर तय होगी। इस बयान ने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है।
दिलचस्प बात यह है कि ट्रस्ट की बैठक से ठीक एक रात पहले स्वामी गोविंद देव गिरी ने भावुक बयान जारी किया था। उस समय उन्होंने कहा था कि उन्हें बैंक खातों की जानकारी नहीं है, वे किसी बैंक खाते के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता नहीं हैं और वित्तीय संचालन में उनकी भूमिका सीमित है। लेकिन अब उसी मामले में उन्होंने स्वयं को ट्रस्ट का कोषाध्यक्ष बताते हुए कोष की जिम्मेदारी स्वीकार की है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मंदिर में आने वाला चढ़ावा ही ट्रस्ट के कोष का हिस्सा बनता है, तो उसकी निगरानी और सुरक्षा की अंतिम जिम्मेदारी किसकी मानी जाए। क्या चढ़ावे और ट्रस्ट के कोष को अलग-अलग जिम्मेदारियों में बांटा गया था, या फिर पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया अभी भी स्पष्ट नहीं है। यही कारण है कि गोविंद देव गिरी के ताजा बयान के बाद विवाद और गहरा गया है।
राम मंदिर जैसे आस्था के सबसे बड़े केंद्र से जुड़े इस विवाद पर देशभर की नजर बनी हुई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ट्रस्ट इस मामले में क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण देता है और जांच के बाद जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की जाती है। गोविंद देव गिरी के बयान ने पूरे विवाद को नया आयाम दे दिया है और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
Location : Ayodhya
Published : 7 July 2026, 11:29 AM IST