हिंदी
वेदांता का 1,908 करोड़ का बड़ा दांव (Source: Pinterest)
New Delhi/Jaipur: वेदांता समूह की कंपनी केयर्न ऑयल एंड गैस ने राजस्थान के तेल क्षेत्रों में कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने के लिए 1,908 करोड़ (करीब 200 मिलियन डॉलर) के निवेश की योजना बनाई है। कंपनी का लक्ष्य उन्नत तकनीक के जरिए उत्तरी राजस्थान के प्रमुख मंगला ऑयलफील्ड से अधिक मात्रा में कच्चा तेल निकालना और देश की विदेशी तेल आयात पर निर्भरता को कम करने में योगदान देना है।
इस निवेश के तहत कंपनी मंगला तेल क्षेत्र में Enhanced Oil Recovery (EOR) और आधुनिक सबसरफेस इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल करने की तैयारी में है। योजना के अनुसार, तेल की रिकवरी दर को मौजूदा करीब 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
अगर यह योजना सफल रहती है तो राजस्थान के इस तेल क्षेत्र से घरेलू कच्चे तेल के उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है।
केयर्न ऑयल एंड गैस की ओर से करीब ₹1,908 करोड़ का निवेश वित्त वर्ष 2027 तक किए जाने की योजना बताई गई है। इसका मुख्य उद्देश्य पहले से मौजूद तेल भंडार से अधिकतम तेल निकालने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग करना है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ने से आयात बिल कम करने और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
घरेलू स्तर पर कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ने से भारत की विदेशी बाजारों पर निर्भरता कम हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर देश की अर्थव्यवस्था और ईंधन कीमतों पर पड़ता है।
मंगला ऑयलफील्ड में उत्पादन बढ़ने की स्थिति में:
तेल और गैस क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में निवेश करने से पहले जोखिमों को समझना जरूरी है। इस सेक्टर का प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, सरकारी नीतियों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों से प्रभावित होता है।
विशेषज्ञों की सामान्य सलाह के अनुसार, किसी एक कंपनी या सेक्टर में पूरी पूंजी लगाने के बजाय निवेश को अलग-अलग विकल्पों में बांटकर जोखिम को संतुलित रखना चाहिए। निवेश से पहले व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति और जोखिम उठाने की क्षमता पर भी विचार जरूरी है।
वेदांता और केयर्न ऑयल एंड गैस का यह निवेश राजस्थान के मंगला तेल क्षेत्र की उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आधुनिक तकनीक के जरिए तेल रिकवरी को वास्तव में दोगुना करने का लक्ष्य हासिल हो पाएगा और क्या इससे भारत की विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी?
Location : New Delhi
Published : 31 August 2026, 12:18 PM IST
No related posts found.