
प्रियंका गोयल (Img- Instagram)
New Delhi: UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए दिल्ली की प्रियंका गोयल एक जीती-जागती मिसाल हैं। जब लगातार असफलताएं किसी भी इंसान के हौसले को तोड़ सकती हैं, तब प्रियंका ने खुद पर भरोसा बनाए रखा।
चार बार प्रीलिम्स में असफलता का कड़वा स्वाद चखने और 7 सालों तक लगातार संघर्ष करने के बाद भी उन्होंने कदम पीछे नहीं हटाए। अपने छठे और अंतिम प्रयास में उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2022 में 369वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि धैर्य और सच्ची लगन के आगे कोई भी मंजिल कठिन नहीं है।
दिल्ली के पीतमपुरा की रहने वाली प्रियंका की शुरुआती पढ़ाई महाराजा अग्रसेन पब्लिक स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के केशव महाविद्यालय से बीकॉम ऑनर्स की डिग्री हासिल की।
स्कूली दिनों में उनका सपना सिविल सेवक बनना नहीं, बल्कि अपनी कॉमर्स टीचर से प्रेरित होकर एक शिक्षिका बनना था। हालांकि, ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने अपनी राह बदली और सिविल सर्विसेज की तैयारी का कठिन रास्ता चुना।
प्रियंका का UPSC का सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा। शुरुआती प्रयासों में उन्हें सिलेबस और सही किताबों की सटीक जानकारी नहीं थी, जिसके कारण वे लगातार असफल हुईं। पहले और दूसरे प्रयास में वे प्रीलिम्स की बाधा पार नहीं कर सकीं। तीसरे प्रयास में उन्होंने मेन्स तो दिया, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी।
चौथे और पांचवें प्रयास में वे दोबारा प्रीलिम्स में ही अटक गईं। लगातार मिली हार से उनके मन में यह सवाल उठने लगा था कि क्या उन्होंने यह राह चुनकर कोई गलती कर दी है। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने ऑप्शनल विषय 'पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन' (जिसमें उन्होंने 292 अंक हासिल किए) के दम पर छठे प्रयास में सीधा मुकाम हासिल किया।
DANICS सेवा में चयन के बाद प्रियंका गोयल वर्तमान में दिल्ली के एक्साइज एंटरटेनमेंट एंड लग्जरी टैक्स विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर कार्यरत हैं। अपनी मेहनत और लगन से मिली इस सफलता के बाद वे सोशल मीडिया पर भी युवाओं की चहेती बन चुकी हैं। इंस्टाग्राम पर उनके करीब 3.5 लाख फॉलोअर्स हैं, जिन्हें वे अपने अनुभवों से प्रेरित करती रहती हैं।
प्रियंका का मानना है कि सफलता का मूल मंत्र केवल सेल्फ स्टडी है। UPSC अभ्यर्थियों को सलाह देते हुए वे कहती हैं कि कोचिंग संस्थान केवल मार्गदर्शन दे सकते हैं, लेकिन पढ़ना और समझना खुद अभ्यर्थी को ही होता है। ऐसी कोई चीज नहीं है जिसे बिना कोचिंग के खुद से न किया जा सके। प्रियंका की कहानी यह संदेश देती है कि UPSC सिर्फ टॉप रैंक लाने वालों का नहीं, बल्कि बार-बार गिरकर दोबारा उठ खड़े होने वालों का नाम है।
Location : New Delhi
Published : 9 September 2026, 3:59 PM IST