चंदौली जमीन घोटाले में नियुक्ति विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन PCS अधिकारियों को निलंबित किया है। जांच में खलिहान, चकमार्ग, कब्रिस्तान व बंजर भूमि से जुड़े 20 बेदखली नोटिस अवैध रूप से वापस लेने और कब्जादारों के पक्ष में आदेश देने का आरोप सामने आया।

SDM स्तर के तीन PCS अफसर सस्पेंड (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
Lucknow: उत्तर प्रदेश में चंदौली जमीन घोटाले को लेकर प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। नियुक्ति विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन PCS अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इन अधिकारियों पर सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में गंभीर अनियमितताएं बरतने और अवैध कब्जादारों को लाभ पहुंचाने के आरोप हैं।
निलंबित किए गए अधिकारियों में PCS विराग पांडेय (SDM गाजियाबाद), PCS लालता प्रसाद (SDM बुलन्दशहर) और PCS सतीश कुमार (SDM एटा) शामिल हैं। यह कार्रवाई चंदौली के तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा कराई गई जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है।
प्रमुख सचिव नियुक्ति विभाग IAS एम. देवराज के अनुसार जांच में सामने आया कि इन तीनों PCS अधिकारियों ने चंदौली जिले में सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में गंभीर लापरवाही और नियमों की अनदेखी की। आरोप है कि इन्होंने बेदखली के 20 आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) नोटिस वापस ले लिए और इसके साथ ही अवैध कब्जा किए हुए लोगों के पक्ष में आदेश पारित किए।
यह सभी नोटिस सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे को हटाने के लिए जारी किए गए थे, लेकिन बिना वैध कारणों के इन्हें वापस ले लिया गया।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक जिन जमीनों से संबंधित नोटिस वापस लिए गए, वे अत्यंत संवेदनशील श्रेणी की थीं। इनमें खलिहान, चकमार्ग, कब्रिस्तान, परती भूमि और बंजर भूमि शामिल हैं। यह भूमि सार्वजनिक उपयोग और ग्रामीण व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
इन जमीनों पर अवैध कब्जे को हटाने के लिए राजस्व संहिता के तहत कार्रवाई की जा रही थी, लेकिन PCS अधिकारियों द्वारा नोटिस वापस लेने से पूरा अभियान कमजोर पड़ गया।
चंदौली के जिलाधिकारी द्वारा कराई गई जांच में यह स्पष्ट हुआ कि नोटिस वापस लेने की प्रक्रिया में न तो उच्च अधिकारियों की अनुमति ली गई और न ही किसी ठोस कानूनी आधार का उल्लेख किया गया। इससे यह संदेह और गहरा हो गया कि जानबूझकर अवैध कब्जादारों को लाभ पहुंचाया गया।
जांच में यह भी पाया गया कि आदेश पारित करते समय नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।
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नियुक्ति विभाग द्वारा की गई यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले में आगे विस्तृत विभागीय जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर और भी कठोर कार्रवाई संभव है।
तीन PCS अधिकारियों के निलंबन के बाद प्रदेश के प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है।