घंटों चला इंतजार, खाली पड़ी रहीं कुर्सियां; बगहा अस्पताल में डॉक्टरों की बेपरवाही से तड़पते रहे मरीज

पश्चिमी चंपारण के बगहा अनुमंडलीय अस्पताल में लापरवाही के चलते सोमवार को OPD दो घंटे देरी से खुली। 20-30 किमी दूर से आए मरीज घंटों भटकते रहे, लेकिन रजिस्ट्रेशन काउंटर तक बंद था। बायोमेट्रिक हाजिरी से डॉक्टरों के बचने के आरोपों के बीच प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. अशोक कुमार तिवारी ने जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 27 July 2026, 12:59 PM IST

Bagaha: बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में उत्तर प्रदेश और नेपाल की सीमा के पास स्थित बगहा अनुमंडलीय अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। सोमवार को इलाज कराने आए मरीजों और उनके परिवारों को अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही और डॉक्टरों की कथित उदासीनता का खामियाजा भुगतना पड़ा।

OPD करीब दो घंटे की देरी से शुरू हुई

नियम के अनुसार सुबह 8:00 बजे शुरू होने वाली OPD सेवा लगभग एक घंटे 45 मिनट की देरी से शुरू हुई, जिससे दूर-दराज के इलाकों से आए मरीज अस्पताल परिसर में भटकते रहे। सबसे चिंताजनक बात यह थी कि सुबह 8:00 बजे के बाद भी OPD क्षेत्र में न तो कोई सुरक्षा गार्ड और न ही अस्पताल का कोई जिम्मेदार कर्मचारी मौजूद था।

ये भी पढ़ें - Bihar: पूर्वी चंपारण से गिरफ्तार हुआ पीएफआई का महत्वपूर्ण कार्यकर्ता, पढ़ें पूरी अपडेट

रजिस्ट्रेशन काउंटर बंद रहा

रजिस्ट्रेशन काउंटर बंद रहा, जबकि मरीज अपनी पर्ची बनवाने और डॉक्टरों के आने का इंतजार करते रहे। सुबह करीब 9:30 बजे एक महिला कर्मचारी दवा वितरण कक्ष की सफाई करती दिखी, लेकिन नियमित OPD कामकाज अभी शुरू नहीं हुआ था।

मरीजों ने निराशा जताई

इलाज कराने आए कई मरीजों ने निराशा जताई, जिनमें अहिरवलिया गांव (नगर थाना क्षेत्र) की मीना कुमारी, चौबारिया (चौतरवा थाना क्षेत्र) के आशुतोष कुमार, रैबारी महुआवा के सगीर अंसारी और पंचरुखिया सिरिसिया (नौरंगिया थाना क्षेत्र) के ताज मोहम्मद शामिल थे। उन्होंने बताया कि वे अस्पताल जल्दी पहुंचने के लिए 20 से 30 किलोमीटर का सफर तय करके आए थे, ताकि समय पर इलाज कराकर घर लौट सकें; हालांकि, घंटों इंतजार करने के बावजूद न तो उनका रजिस्ट्रेशन हो सका और न ही डॉक्टर समय पर आए।

OPD का देर से शुरू होना आम समस्या

स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल में OPD का समय पर शुरू न होना कोई नई बात नहीं है। ज्यादातर दिनों में मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है क्योंकि डॉक्टर देर से आते हैं। इससे न केवल आम जनता की मुश्किलें बढ़ती हैं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठते हैं।

ये भी पढ़ें - Bihar: चंपारण में जहरीली शराब पीने से 4 की मौत, पूरे इलाके मचा हड़ंकप

रोस्टर में छह डॉक्टर शामिल

अस्पताल द्वारा जारी ड्यूटी रोस्टर के अनुसार, सोमवार को OPD और IPD में छह डॉक्टरों की तैनाती होनी थी। IPD (इन-पेशेंट डिपार्टमेंट) में दिन और रात की शिफ्ट के लिए अलग-अलग ड्यूटी रोस्टर तैयार किए गए थे। इसके बावजूद, मरीजों का आरोप है कि रोस्टर सिर्फ कागजों पर है और ज्यादातर डॉक्टर तय समय पर अस्पताल नहीं पहुंचते।

रोस्टर कागज पर, लेकिन डॉक्टर नदारद?

सूत्रों के अनुसार, कुछ डॉक्टर अपनी हाजिरी लगाने के लिए हफ्ते में सिर्फ एक बार हेडक्वार्टर आते हैं और बाकी समय अस्पताल से नदारद रहते हैं। इससे स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की उपलब्धता पर असर पड़ता है, जिससे मरीजों को जरूरी इलाज नहीं मिल पाता। ऐसी स्थिति अस्पताल प्रशासन की निगरानी प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

बायोमेट्रिक सिस्टम पर सवाल

अस्पताल का बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम भी पूरी तरह से कारगर नहीं रहा है। सरकार ने आदेश दिया है कि सभी डॉक्टरों और स्टाफ की हाजिरी बायोमेट्रिक मशीनों से दर्ज की जाए और वेतन का भुगतान इन्हीं रिकॉर्ड्स के आधार पर हो। हालाँकि मशीनें उपलब्ध हैं और स्टाफ नियमित रूप से अपनी हाजिरी लगाते हैं, लेकिन आरोप है कि कई डॉक्टर इस सिस्टम से बच निकलते हैं। नतीजतन, हाजिरी की सही तस्वीर साफ नहीं हो पाती।

ये भी पढ़ें - Bihar: पश्चिम चंपारण में महिलाओं पर जुल्म, ऑपरेशन के दौरान धोखे से सात महिलाओं का गर्भाशय निकाला गया

डिप्टी सुपरिटेंडेंट ने जांच का भरोसा दिया

इस मुद्दे पर बात करते हुए, सब-डिविजनल अस्पताल के प्रभारी डिप्टी सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक कुमार तिवारी ने माना कि मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद सभी डॉक्टर बायोमेट्रिक मशीनों का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी जाएगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि नियमों के अनुसार OPD सेवाएं सुबह 8:00 बजे शुरू होनी चाहिए; सोमवार को हुई देरी की जांच की जाएगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

कमजोर पड़ रहा सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा

अस्पतालों में कुप्रबंधन की बार-बार होने वाली घटनाएं बताती हैं कि जब तक प्रशासन समय पर और कड़े कदम नहीं उठाता, सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में जनता का भरोसा कम होता रहेगा। मरीजों का कहना है कि उन्हें समय पर इलाज, डॉक्टरों की नियमित उपलब्धता और एक जवाबदेह स्वास्थ्य सेवा प्रणाली चाहिए सिर्फ कागजों पर किए गए दावे नहीं।

Location :  Bagaha

Published :  27 July 2026, 12:59 PM IST