
विजय सहनी हत्याकांड में एक और दोषी को उम्रकैद (Img: Dynamite News)
Bagaha: बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के बगहा पुलिस जिला अंतर्गत रामनगर थाना क्षेत्र के चर्चित विजय सहनी हत्याकांड में अदालत ने एक और दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। शुक्रवार को जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने दोषसिद्ध अभियुक्त अशोक यादव को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास की सजा दी। इसके साथ ही उस पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
अदालत ने धारा 201 के तहत भी अशोक यादव को सात वर्ष के कारावास और 25 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर दोनों धाराओं में अलग-अलग छह-छह महीने का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। कोर्ट ने जेल में पहले से बिताई गई निरोध अवधि को सजा की अवधि में समायोजित करने का भी आदेश दिया है।
यह मामला रामनगर थाना कांड संख्या 189/2022 से जुड़ा है। घटना एक मई 2022 की बताई गई है। अभियोजन के अनुसार, विजय सहनी को पोखरा विवाद सुलझाने के बहाने फोन करके बुलाया गया था। इसके बाद वह बाइक से अपने घर से निकले, लेकिन फिर वापस नहीं लौटे।
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काफी समय बीतने के बाद परिवार वालों ने उनकी तलाश शुरू की। जब कोई जानकारी नहीं मिली तो पुलिस को सूचना दी गई। मामले की जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को आरोपियों से जुड़ी अहम जानकारी मिली।
घटना के करीब सात दिन बाद महफूज अंसारी और तेतर राम की निशानदेही पर गोवर्धना जंगल क्षेत्र में एक गड्ढे से विजय सहनी का शव बरामद किया गया। शव की पहचान परिजनों ने अंगूठी और घड़ी के आधार पर की। इसके बाद पुलिस ने जांच तेज करते हुए आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 10 गवाहों को अदालत में पेश किया। इनमें विजय सहनी की पत्नी आशा देवी, उनके पुत्र राहुल कुमार सहनी, चिकित्सक डॉ. विनय कुमार और अनुसंधानकर्ता संतोष कुमार जायसवाल प्रमुख रहे।
अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल फोन और बाइक समेत कई साक्ष्य पेश किए। इन गवाहों और दस्तावेजों के आधार पर अभियोजन ने आरोप साबित करने की दलील दी। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अशोक यादव को दोषसिद्ध करार दिया और अब उसे उम्रकैद की सजा भुगतनी होगी।
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इस हत्याकांड में अशोक यादव से पहले पांच अभियुक्तों को भी सजा सुनाई जा चुकी है। पांच सितंबर को महफूज अंसारी, राजकिशोर महतो, तेतर राम उर्फ साधु, श्री मुशहर और गीता देवी को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा दी थी।
अभियोजन पक्ष के एपीपी जितेंद्र भारती के अनुसार, संपत्ति के लालच में गीता देवी ने अपने भाई विजय सहनी की हत्या की साजिश रची थी। अब अशोक यादव को मिली सजा के बाद इस चर्चित हत्याकांड में दोषसिद्ध अभियुक्तों पर अदालत का शिकंजा और मजबूत हुआ है।
Location : Bagaha
Published : 11 September 2026, 7:09 PM IST